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पंजाब में ड्रोन से नशा तस्करी पर काबू पाने के लिए नई रणनीतियाँ

पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिसमें ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। पुलिस ने फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। एंटी-ड्रोन सिस्टम और त्वरित प्रतिक्रिया टीमें तस्करी पर काबू पाने में मदद कर रही हैं। जानें इस अभियान के तहत की गई कार्रवाइयों और उनके प्रभाव के बारे में।
 

पंजाब में नशा तस्करी की बदलती तस्वीर


चंडीगढ़: पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के माध्यम से नशा तस्करी के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण तस्करी के तरीके में बदलाव आया है। अब फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पंजाब में नशा-रोधी कानूनों के कार्यान्वयन में हेरोइन की लत के बजाय फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की लत एक बड़ी चुनौती बन गई है।


एंटी-ड्रोन तकनीक से हेरोइन तस्करी पर नियंत्रण

पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब पुलिस द्वारा ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए कई स्तरों पर प्रतिक्रिया दी जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप हेरोइन की उपलब्धता में कमी आई है। पंजाब पुलिस ने 09 एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किए हैं, जिनमें से 03 'बाज की आंख' सिस्टम पहले से ही अमृतसर, तरन तारन और फिरोजपुर में कार्यरत हैं, जो ड्रोन का पता लगाकर उन्हें जाम कर देते हैं।


लंबी अवधि के लिए कार्य करने वाले मोबाइल ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म 'ड्रोन सेंस डी200 प्रो' की 03 यूनिटें सीमावर्ती जिलों में तैनात की गई हैं, जो त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती हैं। यह प्रणाली ड्रोन से संबंधित गतिविधियों की सटीक जानकारी प्रदान करती है, जिससे समय पर कार्रवाई संभव होती है।


गांवों की निगरानी और ड्रोन रिस्पांस टीम

प्रवक्ता ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में 'विलेज डिफेंस कमेटियों' (वीडीसी) को 'ड्रोन रिस्पांस टीमों' के साथ जोड़ा गया है। ये समितियाँ पुलिस के लिए 'आंख और कान' का काम करती हैं। 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत 01-03-2025 से अब तक लगभग 80,000 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं।


नशा तस्करी नेटवर्क के आर्थिक आधार को तोड़ने के लिए वित्तीय जांच का सहारा लिया जा रहा है, जिसके तहत 336 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की गई है। नशों से संबंधित जानकारी देने के लिए बनाई गई इनामी नीति के तहत प्रत्येक बरामद ड्रोन पर 25,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाता है।


पंजाब पुलिस की बहु-स्तरीय रणनीति का प्रभाव

पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि एंटी-ड्रोन तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया टीमें, बीएसएफ के साथ समन्वय, सामुदायिक सतर्कता, सीसीटीवी निगरानी, नाके, खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तारियां, और पुनर्वास पर आधारित बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी की गई नशों की उपलब्धता में कमी आई है।


हालांकि, नए रुझान यह दर्शाते हैं कि दूसरे राज्यों से तस्करी किए जाने वाले फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पंजाब में नशों से संबंधित कानून लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती बन रहे हैं।


11.54 लाख नशीली गोलियां और कैप्सूल की बरामदगी

प्रवक्ता ने बताया कि अन्य राज्यों से पंजाब में बड़ी मात्रा में फार्मास्यूटिकल ड्रग्स आ रही हैं। वर्ष 2025 से अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल से जुड़ी खेपों में से 11.54 लाख नशीली गोलियां/कैप्सूल बरामद किए गए हैं।


पंजाब में मिलने वाली फार्मास्यूटिकल ड्रग्स में से 80 प्रतिशत गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से आती हैं, जो कि पहले के रुझान के विपरीत है।


अंतरराज्यीय तालमेल से तस्करी रोकने पर जोर

पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के बढ़ते उपयोग से निपटने के लिए अंतरराज्यीय तालमेल आवश्यक है। निर्माताओं और वितरकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन राज्यों के साथ समन्वय बनाना जरूरी है, जहां से ये नशीले पदार्थ बनते हैं या जिनके जरिए इनकी तस्करी होती है।


पंजाब पुलिस संबंधित राज्यों के समक्ष यह मामला उठाएगी, ताकि निर्माण इकाइयों के संबंध में बेहतर नियम सुनिश्चित किए जा सकें और सभी फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की बिक्री, खरीद और तस्करी पर नजर रखी जा सके।