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पंजाब में पूसा-44 और हाइब्रिड धान की खेती पर रोक, किसानों को दी गई सलाह

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने धान की बुवाई के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें किसानों को पूसा-44 और हाइब्रिड धान की किस्मों से दूर रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने चेतावनी दी है कि ये किस्में अधिक पानी की मांग करती हैं और मंडी में बिक्री के दौरान आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं। कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात कर इन किस्मों को डी-नोटिफाई करने की मांग की थी, जिसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने पूसा-44 को आधिकारिक रूप से डी-नोटिफाई कर दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
 

पंजाब में धान की बुवाई के लिए नई एडवाइजरी

चंडीगढ़: पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने धान की बुवाई के सीजन की शुरुआत से पहले किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विभाग ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि किसान आगामी खरीफ सीजन में पूसा-44 और हाइब्रिड धान की किस्मों की खेती से बचें। विभाग ने बताया कि ये किस्में न केवल अधिक पानी की मांग करती हैं, बल्कि मंडी में इनकी बिक्री के दौरान किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। किसानों को केवल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) द्वारा प्रमाणित किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी गई है।


पिछले अनुभवों से मिली सीख

पंजाब के किसान लंबे समय से पूसा-44 और विभिन्न हाइब्रिड धान की किस्मों की खेती कर रहे थे। लेकिन इन किस्मों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये पकने में अधिक समय लेती हैं और भूजल का अत्यधिक दोहन करती हैं। खरीफ सीजन 2024 में हाइब्रिड धान की मिलिंग के दौरान दाने टूटने की समस्या भी सामने आई थी, जिससे उपज की गुणवत्ता में गिरावट आई और किसानों को मंडियों में अपनी फसल बेचने में कठिनाई हुई।


कृषि विभाग की पहल

इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, राज्य का कृषि विभाग लगातार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पूसा-44 और हाइब्रिड धान को डी-नोटिफाई करने की मांग कर रहा था। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस मुद्दे पर विशेष मुलाकात की और जमीनी हकीकत से अवगत कराया। इसके परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार ने बीज अधिनियम 1966 की धारा 5 के तहत 31 दिसंबर 2025 को पूसा-44 किस्म को आधिकारिक रूप से डी-नोटिफाई कर दिया है।


हाइब्रिड धान पर भी कार्रवाई

पूसा-44 के बाद, हाइब्रिड धान पर भी रोक लगाने की प्रक्रिया चल रही है। भारत सरकार ने 19 फरवरी 2026 को पंजाब के कृषि विभाग को पत्र लिखकर विस्तृत जानकारी मांगी थी। विभाग ने 24 फरवरी 2026 को सभी आवश्यक डेटा केंद्र सरकार को सौंप दिया है। हाइब्रिड धान को डी-नोटिफाई करने की प्रक्रिया वर्तमान में प्रगति पर है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां एक बार फिर केंद्रीय कृषि मंत्री से बैठक करने की योजना बना रहे हैं।


किसानों के लिए अपील

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. गुरजीत सिंह बराड़ ने सभी किसानों से अपील की है कि वे खरीफ 2026 के सीजन में इन प्रतिबंधित किस्मों से दूर रहें। उन्होंने बताया कि इन किस्मों को अधिक पानी की आवश्यकता होती है और ये बीमारियों और कीटों के हमले के प्रति भी संवेदनशील होती हैं। इसके अलावा, विभाग ने सभी सीड डीलरों और बीज विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी सीजन के लिए अपनी दुकानों में पूसा-44 और हाइब्रिड धान के बीजों का स्टॉक न रखें, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।