पंजाब में बाढ़ की स्थिति पर कैबिनेट मंत्री का गुस्सा, केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
बाढ़ से प्रभावित पंजाब में हालात गंभीर
पानी छीनने के लिए सभी तैयार थे, अब कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा : गोयल
चंडीगढ़/फाजिल्का। पहाड़ों और डैमों से आ रहा पानी पंजाब के गांवों और शहरों में भारी तबाही मचा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के साथ-साथ अन्य बचाव दलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। इस संकट का जायजा लेने पहुंचे जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने भावुक होकर पड़ोसी राज्यों और केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब पंजाब से पानी की जरूरत थी, तब केंद्र सरकार ने सभी नियमों को ताक पर रखकर पानी छीनने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन अब जब पंजाब को सहायता की आवश्यकता है, तो कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा।
केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल
कावांवाली पत्तन पर बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री गोयल ने कहा कि पंजाब, जो देश के लिए अनाज का भंडार है, में आई बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार को बिना किसी मांग के राहत पैकेज प्रदान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों को पंजाब का पानी चाहिए, उन्हें इस संकट में मदद के लिए आगे आना चाहिए।
मंत्री ने बताया कि पहाड़ों और पंजाब में हुई बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, लेकिन पंजाब सरकार हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तत्पर है। सभी विभागों की टीमें फील्ड में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और उनकी कैबिनेट के सभी मंत्री जनता के बीच जाकर राहत कार्यों की जानकारी दे रहे हैं।
विशेष गिरदावरी के आदेश
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों के लिए अपना हेलीकॉप्टर भी तैनात किया है। मुख्यमंत्री ने पहले ही विशेष गिरदावरी के आदेश दिए हैं और नुकसान की भरपाई मुआवजे के माध्यम से की जाएगी। राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है, जहां उन्हें खाने-पीने और रहने की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
गोयल ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में हरे चारे और भूसे की कमी को देखते हुए पूरे पंजाब के लोग एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। एनडीआरएफ की टीमों के साथ-साथ सेना भी जिला प्रशासन की सहायता कर रही है, और आज भी 100 से अधिक लोगों को किश्तियों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में सात राहत शिविर संचालित हो रहे हैं।