पंजाब सरकार का नया कानून: निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण
पंजाब सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय
चंडीगढ़- पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की शिकायतों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि राज्य सरकार जल्द ही एक नया कानून लाने जा रही है, जो निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर कड़ा नियंत्रण लगाएगा।
फीस वृद्धि की सीमा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत कोई भी निजी स्कूल सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेगा। यदि किसी स्कूल ने पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, तो उसे अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को लौटानी होगी।
विधानसभा में पेश होगा कानून
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही अध्यादेश जारी किया जाएगा, जिसके बाद आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा। यह नियम सभी निजी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।
अभिभावकों के लिए राहत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। स्कूलों को आवश्यक सामग्री की सूची पहले से सार्वजनिक करनी होगी, जिससे अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं।
स्कूलों का वार्षिक ऑडिट
सरकार ने निजी स्कूलों की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक ऑडिट की व्यवस्था भी प्रस्तावित की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रत्येक स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड की नियमित जांच की जाएगी ताकि फीस वृद्धि और अन्य शुल्कों की वैधता का आकलन किया जा सके।
पुरानी व्यवस्था में संशोधन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट' में संशोधन करने जा रही है। उनका आरोप था कि 2019 में लागू की गई व्यवस्था के बाद निजी स्कूलों को फीस वृद्धि में अधिक स्वतंत्रता मिली थी, जिसका कई संस्थानों ने दुरुपयोग किया।
छात्रा की आत्महत्या का संदर्भ
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अमृतसर में 12वीं कक्षा की छात्रा की आत्महत्या की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक दुखद मामला है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा पर फीस संबंधी दबाव बनाए जाने की बातें सामने आई हैं।
अभिभावकों की शिकायतों की जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारियों के पास फीस वृद्धि और अन्य अनियमितताओं को लेकर जो शिकायतें लंबित हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।