पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं की घबराहट: अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद लौटाए जा रहे पैसे
कोलकाता में TMC में हड़कंप
कोलकाता: लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में खलबली मच गई है। इस घटना के बाद पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता चिंतित हैं। आरोप है कि वे जबरन वसूली गई रकम लौटाने में जुट गए हैं। कई नेता तो क्षेत्र छोड़कर भाग गए हैं, जबकि उनके रिश्तेदार घर-घर जाकर पैसे वापस कर रहे हैं।
TMC नेता लौटाने में लगे
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोचबिहार जिले में TMC के नेताओं ने ग्रामीणों से जबरन लिए गए पैसे लौटाना शुरू कर दिया है। यह राशि कट मनी या जबरन वसूली के तहत इकट्ठा की गई थी। रविवार को फकिरेर कुठी क्षेत्र में कई ग्रामीणों को एकत्रित कर पैसे लौटाए गए।
पछागढ़ ग्राम पंचायत के बूथ अध्यक्ष तपन डे ने कई लोगों को व्यक्तिगत रूप से पैसे लौटाए। क्षेत्र के प्रभावशाली नेता बाबई बरमन के पिता भी खुद आकर ग्रामीणों को पैसे लौटाने पहुंचे। जो बड़े नेता भाग गए हैं, उनके परिवार के सदस्य अब इस कार्य को संभाल रहे हैं।
80 लाख रुपये की वसूली का आरोप
भाजपा के स्थानीय नेता सुरेंद्र बरमन ने आरोप लगाया कि एक पंचायत सदस्य ने TMC के अन्य नेताओं के साथ मिलकर क्षेत्र के लोगों से लगभग 80 लाख रुपये वसूले थे। अब चुनाव परिणामों और हमले की घटना के बाद डर के मारे वे पैसे लौटाने पर मजबूर हो रहे हैं। सुरेंद्र ने कहा, “नेता गायब हैं और उनके रिश्तेदार मजबूरी में पैसे वापस कर रहे हैं।”
सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला
शनिवार को अभिषेक बनर्जी कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके सोनारपुर गए थे। वहां वे चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए एक TMC कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। गुस्साए लोगों ने उन पर अंडे और पत्थर फेंके, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया।
ममता बनर्जी का तीखा बयान
TMC प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए भाजपा शासित केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा वापस ली जा रही है और पुलिस का दुरुपयोग कर TMC विधायकों और कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है।
ममता ने कहा, “पुलिस का इस्तेमाल विधायकों को धमकाने और इस्तीफा दिलवाने के लिए किया जा रहा है। यह लोकतंत्र की हत्या है।” इसके साथ ही उन्होंने दलबदलुओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कई लोग वर्षों तक सत्ता का लाभ उठाने के बाद अब स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं।