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प्रयागराज में कोल्ड स्टोरेज में विस्फोट: दो लोगों की जान गई, कई घायल

प्रयागराज के गंगापार इलाके में एक कोल्ड स्टोरेज में हुए विस्फोट ने दो लोगों की जान ले ली और कई श्रमिक घायल हो गए। यह घटना उस समय हुई जब आलू का भंडारण चल रहा था। विस्फोट के कारण इमारत की छत और दीवारें गिर गईं, जिससे 15 से अधिक लोग मलबे में दब गए। राहत कार्य में अमोनिया गैस के रिसाव ने बाधा डाली। जानें इस दर्दनाक हादसे की पूरी जानकारी।
 

प्रयागराज में हुआ भयानक हादसा


सोमवार दोपहर को प्रयागराज के गंगापार क्षेत्र में एक गंभीर घटना घटी, जब लखनऊ रोड पर चंदापुर गांव के पास स्थित एक कोल्ड स्टोरेज में जोरदार विस्फोट हुआ। यह कोल्ड स्टोरेज समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री अंसार अहमद से संबंधित बताया जा रहा है। इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और राहत कार्य तुरंत शुरू किया गया।


हादसे में दो लोगों की मौत

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, इस दुर्घटना में दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है। मृतकों में से एक 32 वर्षीय ज्योतिष है, जो बिहार के सहरसा का निवासी था, जबकि दूसरा 44 वर्षीय जगदीश प्रयागराज के फाफामऊ क्षेत्र के चंदापुर गांव का निवासी था। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि मृतकों की संख्या इससे अधिक हो सकती है।


विस्फोट का कारण और स्थिति

जानकारी के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण किया जा रहा था, तभी अमोनिया गैस से भरे टैंक में अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि इमारत की छत और दीवारें गिर गईं, जिससे 15 से अधिक श्रमिक मलबे में दब गए। कई श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उन्हें स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में अमरदीप सादा, रंजीत और धर्मेंद्र जैसे नाम शामिल हैं।


प्रशासन और दमकल विभाग की कार्रवाई

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, अमोनिया गैस के तेज रिसाव के कारण राहत कार्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गैस की तीव्र गंध के कारण बचावकर्मियों के लिए कोल्ड स्टोर के अंदर जाना मुश्किल हो गया, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा हो गया।


इलाके में अफरा-तफरी का माहौल

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चीख-पुकार और भगदड़ का माहौल बन गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर इकट्ठा हो गए। गैस के प्रभाव से बचने के लिए लोगों ने अपने चेहरे पर रुमाल और गमछे बांध लिए, क्योंकि दूर खड़े लोगों को भी सांस लेने में कठिनाई हो रही थी।