प्रोफेसर जीपी तलवार: भारतीय विज्ञान के स्तंभ का 100वां जन्मदिन मनाया गया
वैज्ञानिकों ने किया प्रोफेसर जीपी तलवार को सम्मानित
नई दिल्ली: विज्ञान के क्षेत्र में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल अनुसंधान नहीं करते, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक नई दिशा तय करते हैं। ऐसे ही एक महान वैज्ञानिक, प्रोफेसर जीपी तलवार, जिनका जन्म 100 वर्ष पहले हुआ था, को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर विश्वभर के वैज्ञानिकों ने उनकी उपलब्धियों को सराहा।
प्रोफेसर तलवार की वैज्ञानिक यात्रा
इस विशेष समारोह में देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, प्रो. तलवार के पूर्व छात्रों और शोधकर्ताओं ने उनकी छह दशकों की वैज्ञानिक यात्रा को याद किया। इस दौरान प्रो. तलवार के जीवन और उनके योगदान पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें विभिन्न वैज्ञानिकों के श्रद्धांजलि संदेश शामिल हैं।
विदेश में करियर छोड़कर भारत लौटे
विदेश में चमकता भविष्य छोड़ भारत लौटे वैज्ञानिक
प्रो. जीपी तलवार की कहानी केवल एक वैज्ञानिक की सफलता की नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति उनकी निष्ठा की भी कहानी है। उन्होंने फ्रांस के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट पाश्चर में नोबेल पुरस्कार विजेता जैक मोनोड के मार्गदर्शन में पीएचडी की। हालांकि, उन्होंने विदेश में शानदार करियर के अवसरों को छोड़कर भारत लौटने का निर्णय लिया। इसके बाद, उन्होंने देश में जैव-चिकित्सा अनुसंधान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुष्ठ रोग के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान
कुष्ठ रोग के खिलाफ विज्ञान का बड़ा हथियार
प्रो. तलवार का एक प्रमुख योगदान माइकोबैक्टीरियम इंडिकस प्रानी (एमआईपी) आधारित कुष्ठ रोग रोधी टीका है, जिसने भारत में कुष्ठ रोग के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा दी। उनके शोध ने यह साबित किया कि भारतीय वैज्ञानिक भी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खोजें कर सकते हैं।
परिवार नियोजन में ऐतिहासिक पहल
परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक पहल
प्रो. तलवार ने प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने दुनिया के पहले परिवार नियोजन टीके की अवधारणा और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो उस समय विज्ञान के लिए एक नई सोच थी।
संस्थानों के निर्माण में योगदान
संस्थानों के निर्माता भी रहे प्रो. तलवार
प्रो. तलवार की उपलब्धियां केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने देश में वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एम्स में बायोकैमिस्ट्री विभाग की नींव रखने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई) की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा
दुनिया के वैज्ञानिक भारत आए, नई पीढ़ी को मिली दिशा
प्रो. तलवार की प्रतिष्ठा ने कई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों को भारत आने और अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों छात्र आज प्रमुख शोध प्रयोगशालाओं में कार्यरत हैं, जिससे उन्होंने कई वैज्ञानिक पीढ़ियों को तैयार किया।
सम्मानों की लंबी सूची
सम्मानों की लंबी फेहरिस्त
प्रो. तलवार को उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, फ्रांस सरकार ने उन्हें ऑफिसिएर दे ला लेजियन द ऑनर से नवाजा है। समारोह में वक्ताओं ने भारत सरकार से उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग भी की।
सम्मान का मंच सजाया शिष्यों ने
शिष्यों ने मिलकर सजाया सम्मान का मंच
इस समारोह का आयोजन प्रो. तलवार के पूर्व छात्रों और सहयोगियों के योगदान से किया गया। समारोह समिति के संयोजक डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया और प्रो. तलवार की पत्नी श्रीमती रक्षा तलवार के योगदान को भी याद किया।