☰
×

बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए नई व्यवस्था: वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए गेट नंबर चार का उपयोग

वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें वीआईपी श्रद्धालुओं को गेट नंबर चार से प्रवेश और गेट नंबर एक से निकास करने की अनुमति दी गई है। यह बदलाव शरद पूर्णिमा से प्रभावी है और इसका उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा को कम करना है। सुरक्षा के लिए छह पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। जानें इस नई व्यवस्था के बारे में और कैसे यह श्रद्धालुओं के लिए फायदेमंद साबित होगी।
 

वृंदावन में दर्शन के लिए नई व्यवस्था

वृंदावन: ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए दर्शन के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। अब वीआईपी श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश के लिए गेट नंबर चार का उपयोग करना होगा, जबकि दर्शन के बाद उन्हें गेट नंबर एक से बाहर निकाला जाएगा। यह नई व्यवस्था शरद पूर्णिमा से प्रभावी हो गई है।


आम श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत

कार्तिक महीने में वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ बढ़ सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए, मंदिर की प्रबंधन समिति ने प्रवेश और निकास की व्यवस्था में बदलाव किया है। पहले वीआईपी श्रद्धालुओं को गेट नंबर दो से प्रवेश दिया जाता था, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं को असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत इस समस्या को हल करने का प्रयास किया गया है।


सुरक्षा में तैनात रहेंगे 6 पुलिसकर्मी

अब वीआईपी श्रद्धालु गेट नंबर चार से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे और दर्शन के बाद गेट नंबर एक से बाहर निकलेंगे। व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए मंदिर की सुरक्षा में छह पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जो वीआईपी श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के बाद निर्धारित निकास द्वार से बाहर निकालने में मदद करेंगे।


सेवायत सदस्य ने दी जानकारी

उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और कार्तिक महीने में भीड़ और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में गेट नंबर दो से वीआईपी श्रद्धालुओं को प्रवेश कराने में कठिनाइयाँ आ रही थीं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब गेट नंबर चार से प्रवेश और गेट नंबर एक से निकास की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाना और सामान्य श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा को कम करना है।