बाबा आसाराम बापू की उम्रकैद की सजा बरकरार, लेकिन कुछ धाराएं हटीं
राजस्थान में आसाराम बापू की कानूनी स्थिति
राजस्थान: बाबा आसाराम बापू की कानूनी परेशानियाँ एक बार फिर बढ़ गई हैं। जोधपुर पीठ ने बुधवार को एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में आसाराम को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने आसाराम द्वारा 2018 में निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है।
गंभीर धाराओं को हटाने का फैसला
हालांकि, कानूनी मोर्चे पर आसाराम को आंशिक राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ लगे सामूहिक दुष्कर्म और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं को हटा दिया है। इसके साथ ही, वर्तमान में चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम को अदालत ने तुरंत आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
कानूनी विवाद की शुरुआत
यह मामला 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे थे। लंबी जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और अप्रैल 2018 में एक विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
वकील की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद पीड़िता के वकील पी.सी. सोलंकी ने मीडिया को बताया कि अदालत ने आसाराम की सजा पर कोई रोक नहीं लगाई है और उम्रकैद पूरी तरह प्रभावी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पीड़िता से सलाह लेकर सह-आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
अंतरिम जमानत की स्थिति
आसाराम बापू स्वास्थ्य कारणों से अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं। इससे पहले उन्हें इलाज के लिए मार्च 2024 में पहली बार अल्पकालिक राहत मिली थी। उनकी जमानत अवधि को कई बार बढ़ाया गया है। हाल ही में उनकी अंतरिम जमानत को 7 जुलाई तक के लिए विस्तारित किया गया था। लेकिन अब हाईकोर्ट द्वारा मुख्य सजा को बरकरार रखने और सरेंडर के आदेश के बाद, यह मामला एक नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है।
आरोपों की पुष्टि
यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ ने आसाराम और उनके सहयोगियों द्वारा दायर अपीलों पर संयुक्त सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसकी बहस इसी साल 20 अप्रैल को पूरी हुई थी।
अदालत का निर्णय
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आसाराम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार, पॉक्सो एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न और किशोर न्याय अधिनियम के तहत दर्ज अपराध पूरी तरह से सिद्ध पाए गए हैं। इसलिए उम्रकैद की सजा में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
सह-आरोपियों को बरी किया गया
पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत आसाराम के खिलाफ गैंगरेप और आपराधिक साजिश के आरोपों को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी का फायदा उठाते हुए अदालत ने सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।