बाराबंकी में नशे के खिलाफ बड़ा कदम: एनसीबी ने तस्करों को सुनाई 10 साल की सजा
नशे के कारोबार पर कड़ा प्रहार
नई दिल्ली: बाराबंकी में नशे के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) की लखनऊ शाखा ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। 2017 में हेरोइन और गांजे की बरामदगी से जुड़े मामले में अदालत ने दो आरोपियों को 10-10 वर्ष की कठोर सजा सुनाई है। यह निर्णय मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।
एनसीबी के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को बाराबंकी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शकील, जो चंदवारा का निवासी है, और रामप्यारी, जो पल्हरी, थाना सफदरगंज, बाराबंकी की निवासी है, को दोषी ठहराया।
खुफिया सूचना पर कार्रवाई
यह मामला 27 मई 2017 को शुरू हुआ था। एनसीबी लखनऊ की टीम ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के पास से 340 ग्राम हेरोइन और 160 ग्राम गांजा बरामद किया। दोनों आरोपी अवध-असम एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे थे और बाराबंकी स्टेशन पर उतर रहे थे। मादक पदार्थ काले रंग के थैलों में छिपाए गए थे। जांच में पता चला कि यह खेप नागालैंड के दीमापुर से लाई गई थी।
अदालत में प्रभावी पैरवी, तस्करों को मिली सजा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मादक पदार्थों की तस्करी के गंभीर परिणामों और समाज पर इसके दुष्प्रभावों को उजागर करते हुए कठोर सजा की मांग की। साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
एनसीबी लखनऊ इकाई ने नशामुक्त भारत के अपने संकल्प को दोहराते हुए नागरिकों से तस्करी से संबंधित जानकारी राष्ट्रीय मादक पदार्थ हेल्पलाइन 1933 (मानस) पर देने की अपील की है। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।