बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर का बड़ा दांव, राजनीतिक हलचल तेज
बांकीपुर उपचुनाव की तैयारी
पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। जन सुराज पार्टी ने घोषणा की है कि उनके संस्थापक प्रशांत किशोर इस सीट से चुनाव लड़ेंगे। जैसे ही उनका नाम उम्मीदवार के रूप में सामने आया, चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम मानते हुए प्रचार अभियान को तेज करने की योजना बनाई है।
नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट
बांकीपुर सीट भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद राज्यसभा में भेजा गया, जिसके चलते उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी। इस सीट पर मतदान 30 जुलाई को होगा।
नामांकन प्रक्रिया की तारीखें
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, उपचुनाव के लिए 7 जुलाई को अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे, और 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 17 जुलाई है। मतदान 30 जुलाई को होगा और वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी।
राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा
प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने के बाद विपक्षी दलों के बीच संभावित रणनीतियों पर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस नेता ऋषि मिश्रा का कहना है कि यदि विपक्ष का लक्ष्य भाजपा को हराना है, तो साझा उम्मीदवार पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि अलग-अलग उम्मीदवार उतारने से भाजपा को फायदा हो सकता है। उन्होंने प्रशांत किशोर को कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं से बातचीत करने का सुझाव दिया है।
राजद की प्रतिक्रिया
राजद ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव के संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जो भी निर्णय लेंगे, वही पार्टी का आधिकारिक रुख होगा।
भाजपा का गढ़ मानी जाती है बांकीपुर
बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पहले नवीन किशोर और फिर उनके पुत्र नितिन नवीन करते रहे हैं। इस बार का उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है, जबकि प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।