बिहार में औद्योगिक विकास की नई लहर: CM सम्राट चौधरी की बड़ी घोषणाएं
बिहार में औद्योगिक विकास की नई शुरुआत
पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद औद्योगिक क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना का ऐलान किया है। उन्होंने जानकारी दी कि मुजफ्फरपुर और किशनगंज में दो प्रमुख सीमेंट फैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी, जबकि हाजीपुर में देश का तीसरा NIFTEM संस्थान भी बनेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की महत्वपूर्ण घोषणा
CM सम्राट की घोषणा
वट-सावित्री पूजा के अवसर पर गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में पूजा के बाद, CM सम्राट चौधरी ने यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि बिहार में औद्योगिक निवेश का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 67वीं बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
मुजफ्फरपुर और किशनगंज में सीमेंट प्लांट
मुजफ्फरपुर और किशनगंज में सीमेंट प्लांट
मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया और अंबूजा सीमेंट कंपनियों की बड़ी इकाइयों को स्वीकृति मिली है। इन फैक्ट्रियों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
विशेष रूप से उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र के युवाओं को अपने राज्य में ही नौकरी के अवसर प्राप्त होंगे। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से परिवहन, निर्माण और छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा।
हाजीपुर में NIFTEM की स्थापना
हाजीपुर में बनेगा NIFTEM
वैशाली जिले के हाजीपुर में 100 एकड़ भूमि पर देश का तीसरा राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) स्थापित किया जाएगा।
यह संस्थान खाद्य प्रसंस्करण, अनुसंधान, तकनीकी शिक्षा और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे बिहार के कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। मक्का, मखाना, फल-सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
रोजगार और विकास पर प्रभाव
रोजगार और विकास पर प्रभाव
इन परियोजनाओं से पलायन में कमी, स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और युवाओं को बेहतर अवसर मिलने की संभावना है। राज्य सरकार इन्हें "विकसित बिहार" के लक्ष्य से जोड़कर देख रही है। SIPB की बैठक में कुल 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस और 4 परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी भी दी गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ये निर्णय बिहार को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। आने वाले समय में ये परियोजनाएं बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।