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बिहार में ग्राम पंचायतों का नया परिसीमन: जानें क्या बदलने वाला है?

बिहार में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन के लिए अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत पंचायतों के नाम और मुख्यालय में बदलाव संभव है। इस प्रक्रिया के तहत पंचायत चुनाव से पहले सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। जानें इस प्रक्रिया के बारे में विस्तार से और क्या बदलाव होने वाले हैं।
 

ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की शुरुआत


पटना: बिहार में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार और बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने ग्राम पंचायतों के परिसीमन के लिए अधिसूचना जारी की है। यह परिसीमन लोकसभा या विधानसभा सीटों के लिए नहीं, बल्कि ग्राम पंचायतों की नई सीमाओं को निर्धारित करने के लिए किया जा रहा है।


नए नियमों का प्रभाव

नए नियम लागू होने के बाद पंचायतों का स्वरूप, मुख्यालय और सीमाएं कई स्थानों पर बदल सकती हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राज्य में पंचायत चुनाव आयोजित किए जाएंगे।


2011 की जनगणना का उपयोग

2011 की जनगणना बनेगी आधार


राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राम पंचायतों का परिसीमन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। जिस गांव की जनसंख्या सबसे अधिक होगी, उसी के नाम पर पंचायत का नाम रखा जाएगा। इसके साथ ही प्रखंड को इकाई मानकर ग्राम पंचायत क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों का गठन अधिक व्यवस्थित और संतुलित तरीके से हो सकेगा।


परिसीमन की प्रक्रिया का विवरण

कैसे होगी परिसीमन की प्रक्रिया?


बिहार निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सभी जिलों के जिलाधिकारी अपने-अपने प्रखंडों में परिसीमन की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। ग्राम पंचायत क्षेत्र का निर्धारण प्रखंड के उत्तर-पश्चिम हिस्से से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व दिशा तक किया जाएगा।


परिसीमन का प्रारूप सार्वजनिक किया जाएगा, जिसके बाद लोगों से 15 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम सूची जिला गजट में प्रकाशित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे।


पंचायतों के नाम और मुख्यालय में बदलाव

पंचायतों के नाम और मुख्यालय में हो सकते हैं बदलाव


नए नियमों के तहत जिस गांव की जनसंख्या सबसे अधिक होगी, उसे पंचायत का नाम और मुख्यालय बनाया जाएगा। यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत या उससे अधिक है, तो मुख्यालय ऐसे गांव में बनाया जाएगा जहां इन वर्गों का अनुपात सबसे अधिक होगा।


ग्राम पंचायतों का विभाजन

एक गांव में नहीं होंगी कई पंचायतें


नई व्यवस्था के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी गांव को दो या अधिक ग्राम पंचायतों में विभाजित नहीं किया जाएगा। केवल विशेष आवश्यकता होने पर ही ऐसा किया जा सकेगा। पंचायतों की सीमाएं प्राकृतिक आधार, सड़क, रेलवे लाइन या अन्य सार्वजनिक स्थलों को ध्यान में रखकर तय की जाएंगी, ताकि सीमाएं स्पष्ट और विवाद रहित रहें।


पंचायत चुनाव की तैयारी

पंचायत चुनाव से पहले पूरी होगी प्रक्रिया


राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि परिसीमन से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। ग्राम पंचायतों की प्रस्तावित सीमाओं की जानकारी पंचायत, प्रखंड कार्यालय और जिला कार्यालय के सूचना पट पर भी प्रदर्शित की जाएगी। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम सूची जारी होने के बाद ही बिहार में पंचायत चुनाव की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।