बिहार विधान परिषद चुनाव: जन सुराज पार्टी ने घोषित किए अपने उम्मीदवार, जानें कौन हैं मैदान में
बिहार में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: बिहार की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। जन सुराज पार्टी ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने कुल पांच सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों का चयन किया है, जिसकी जानकारी प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
उम्मीदवारों की सूची
जन सुराज ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एसपी राय को उम्मीदवार बनाया है, वहीं दरभंगा स्नातक सीट पर रवींद्र यादव चुनावी दौड़ में शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अफाक अहमद को टिकट दिया गया है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से दिव्या ज्योति और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रजनीश रंजन को भी पार्टी ने उम्मीदवार घोषित किया है। बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों पर चुनाव की घोषणा जल्द होने की संभावना है। इनमें चार सीटें स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की हैं, जिनका मौजूदा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।
अफाक अहमद का दोबारा चुनावी मैदान में उतरना
प्रशांत किशोर ने बताया कि अफाक अहमद एक बार फिर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि छह साल पहले उन्होंने प्रशांत किशोर के समर्थन से यह सीट जीती थी, जबकि उस समय प्रशांत किशोर ने अपनी अलग पार्टी नहीं बनाई थी। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से दिव्या ज्योति को उम्मीदवार बनाया गया है, जो पेशे से वकील और शिक्षाविद हैं और हाल ही में जन सुराज पार्टी में शामिल हुई हैं। यह सीट वर्तमान में जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार के पास है, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।
संगठन विस्तार की दिशा में कदम
प्रशांत किशोर ने यह भी बताया कि पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एसपी राय, दरभंगा स्नातक सीट से रवींद्र यादव और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रजनीश रंजन को चुनावी मैदान में उतारा है। यह चुनाव बिहार विधानसभा चुनाव से अलग होगा और लगभग 30 जिलों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान होगा। जन सुराज पार्टी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने संगठन को मजबूत करने की रणनीति के तहत सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इन चुनावों में उम्मीदवारों का स्थानीय प्रभाव और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।