भारत का स्वास्थ्य मॉडल: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
भारत का स्वास्थ्य कवरेज मॉडल
नई दिल्ली: भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) के लिए अपने बहुआयामी स्वास्थ्य मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आयोजित यूएचसी और वैश्विक स्वास्थ्य से संबंधित मित्र देशों के वार्षिक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया।
उन्होंने बताया कि भारत का उद्देश्य केवल बीमारियों का उपचार नहीं है, बल्कि हर नागरिक को सस्ती, सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर गंभीर बीमारियों के उपचार और डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं तक एक समग्र प्रणाली विकसित की जा रही है।
आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) को भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस योजना के तहत योग्य लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जाता है। सरकार के अनुसार, यह योजना 60 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुंच चुकी है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच
भारत की स्वास्थ्य नीति में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया है। यहां रोगों के उपचार के साथ-साथ रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन, जांच और उपचार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से 12 व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पैकेज उपलब्ध कराए जाते हैं, जिसमें गैर-संचारी रोगों की देखभाल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल और पेलिएटिव केयर जैसी सेवाएं शामिल हैं।
मुफ्त दवाएं और जांच सेवाएं
स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए मुफ्त दवाओं और जांच सेवाओं पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता सुधार के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) को भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
डिजिटल स्वास्थ्य का योगदान
भारत की स्वास्थ्य यात्रा में डिजिटल तकनीक को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में अपनाया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को एकीकृत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। आभा के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सक्षम बनाना और ई-संजीवनी के जरिए टेली-परामर्श उपलब्ध कराना मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद कर रहा है। भारत का यह मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर विशेषज्ञ और उच्चस्तरीय उपचार तक निरंतर देखभाल को मजबूत करने पर केंद्रित है। सरकार का उद्देश्य है कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों तक सीमित न रहें, बल्कि समुदाय और परिवार के दरवाजे तक पहुंचें।