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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: जींद-सोनीपत रेलखंड पर सफल परीक्षण

भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से किया गया और इसे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जींद को इस परियोजना का पायलट स्टेशन बनाया गया है, जहां हाइड्रोजन उत्पादन और भंडारण की सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस कदम से भारत हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित ट्रेनों के विकास में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
 

भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कदम


सोनीपत: भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और आधुनिक परिवहन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, क्योंकि इससे पर्यावरण के अनुकूल रेल सेवाओं की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हुआ है।


जींद-सोनीपत रेलखंड पर परीक्षण की सफलता

हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड परीक्षण हरियाणा के जींद से शुरू किया गया। इस दौरान रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन की गति, सुरक्षा और तकनीकी प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया। परीक्षण की सफलता के बाद, अब ट्रेन को यात्री सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।


VIDEO | Haryana: India's first hydrogen train leaves from Jind for final 120 kmph speed trial.#HydrogenTrain #Jind

(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/ZCEIpaZcpp

— Press Trust of India (@PTI_News) June 26, 2026



जींद: हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना का केंद्र

भारतीय रेलवे ने इस परियोजना के लिए जींद को पायलट स्टेशन के रूप में चुना है। यहां हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और ईंधन भरने की सुविधाएं विकसित की गई हैं, जो ट्रेन के सुरक्षित संचालन और नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करेंगी।


सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीक

हाइड्रोजन ट्रेन में कई आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां स्थापित की गई हैं, जिनमें हाइड्रोजन गैस रिसाव का पता लगाने वाले सेंसर, आग की पहचान करने वाले उपकरण और निरंतर निगरानी करने वाली तकनीक शामिल हैं। ये सभी सिस्टम संभावित खतरों का समय पर पता लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


पर्यावरण के लिए एक बेहतर विकल्प

हाइड्रोजन फ्यूल-सेल तकनीक हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली उत्पन्न करती है, जिससे केवल जलवाष्प निकलता है और प्रदूषण नहीं होता। इसलिए, इसे डीजल इंजन वाली ट्रेनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। यह शोर और वायु प्रदूषण को भी कम करने में सहायक है।


भारत की हरित परिवहन की दिशा में एक कदम

120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफल परीक्षण के बाद, भारत हाइड्रोजन आधारित यात्री रेल सेवा शुरू करने के और करीब पहुंच गया है। इस उपलब्धि के साथ, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित ट्रेनों का सफल विकास और परीक्षण किया है। यह कदम भविष्य में टिकाऊ और हरित रेलवे नेटवर्क बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।