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महादेवी की 13 महीने बाद कोल्हापुर में वापसी, विशेष देखभाल की तैयारी

महादेवी, जो कोल्हापुर में महादेवी के नाम से जानी जाती है, 13 महीने बाद अपने पुराने ठिकाने नांदणी लौट आई है। उसकी यात्रा 1,160 किलोमीटर लंबी थी और लौटने पर उसे भव्य स्वागत मिला। हालांकि, उसकी वापसी बिना शर्त नहीं है; उसे विशेष देखभाल और निगरानी में रखा जाएगा। जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में और कैसे महादेवी की देखभाल की जाएगी।
 

महादेवी की वापसी का जश्न

कोल्हापुर में महादेवी के नाम से जानी जाने वाली हथिनी माधुरी, लगभग 13 महीने बाद अपने पुराने ठिकाने नांदणी लौट आई। शनिवार की रात करीब 2 बजे, उसने गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से 1,160 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। उसकी वापसी की खबर सुनते ही बड़ी संख्या में लोग मठ के बाहर इकट्ठा हो गए और फूलों की वर्षा कर अपनी खुशी का इजहार किया।


महादेवी का इतिहास और यात्रा

माधुरी को 1992 में नांदणी लाया गया था, जब उसकी उम्र केवल चार साल थी। जैन मठ में हाथियों को रखने की परंपरा लगभग 700 साल पुरानी है। माधुरी ने अपने जीवन के 32 साल इसी परिसर में बिताए। जुलाई 2025 में, उसे जामनगर के वनतारा एनिमल सेंटर भेजा गया था, जिसके खिलाफ कोल्हापुर में काफी विरोध हुआ और मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा।


स्वागत समारोह और स्वास्थ्य निगरानी

महादेवी की वापसी बिना शर्त नहीं है। उसकी सेहत को ध्यान में रखते हुए, उच्च पावर कमेटी ने उसकी देखभाल के लिए कई नियम बनाए हैं। उसे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा और उसकी 24 घंटे निगरानी की जाएगी। हर 15 दिन में उसकी मेडिकल जांच होगी।


विशेष सुविधाएं और देखभाल

महादेवी के लिए विशेष शेल्टर तैयार किया गया है, जिसमें उसके पैरों को आराम देने के लिए रबर मैट, गर्मी और मक्खियों से बचाव के लिए फॉगिंग सिस्टम और पानी के फव्वारे शामिल हैं। उसकी जरूरतों के अनुसार भोजन तैयार करने के लिए अलग किचन भी बनाया गया है। इस प्रकार, महादेवी की कोल्हापुर में वापसी तो हो गई है, लेकिन उसकी देखभाल पहले से तय स्वास्थ्य नियमों के तहत होगी।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

अनंत अंबानी के '#वंतारा' से पूरी तरह ठीक होकर लौटी हथिनी 'माधुरी', कोल्हापुर में लाखों की भीड़ ने किया भव्य स्वागत!

यह सिर्फ एक बेजुबान जानवर की घर वापसी नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि भारत की सनातनी संस्कृति में प्रकृति और जीव-जंतुओं को भगवान का रूप मानकर… pic.twitter.com/qm2MVq7c8p

— Arun Shivhare (@ArunShivhare100) September 12, 2026