यमुना की सफाई में वृंदावन का नया सौर ऊर्जा संचालित प्लांट
वृंदावन में यमुना के लिए नई पहल
वृंदावन: यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के प्रयासों में वृंदावन का वाराह घाट स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) एक नई दिशा दिखा रहा है। यह प्लांट, जो 13 एमएलडी की क्षमता के साथ अत्याधुनिक एसबीआर तकनीक पर आधारित है, जिले का पहला ऐसा एसटीपी है जो सौर ऊर्जा से संचालित होता है। यहां प्रतिदिन सीवेज का उपचार किया जा रहा है, जिससे यह यमुना में जाने से पहले साफ किया जा सके। खास बात यह है कि यह प्लांट सामान्य ग्रिड बिजली पर निर्भर नहीं है।
नमामि गंगे योजना के अंतर्गत परियोजना
केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत यमुना की सफाई के लिए जनवरी 2019 में मथुरा में लगभग 500 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया था। इसमें नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण, घाटों की सफाई और पुराने एसटीपी के संचालन एवं रखरखाव की योजनाएं शामिल थीं। इसी योजना के तहत वाराह घाट पर आधुनिक तकनीक से एसटीपी का निर्माण किया गया है।
जल निगम ग्रामीण के मार्गदर्शन में इस प्लांट का निर्माण दिल्ली की एक निजी कंपनी सीमा लैब्स ने किया है। जून 2024 में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसका संचालन शुरू किया जाएगा। वर्तमान में इसके संचालन की जिम्मेदारी भी इसी एजेंसी के पास है। प्रोजेक्ट मैनेजर अजय वर्मा के अनुसार, प्लांट की निर्धारित क्षमता के अनुसार प्रतिदिन लगभग 13 एमएलडी दूषित पानी का उपचार किया जा रहा है।
प्लांट से जुड़े नाले
वाराह घाट एसटीपी को कालीदह पंपिंग स्टेशन के साथ-साथ सुनरख और चैतन्य विहार नालों से जोड़ा गया है। इन नालों और पंपिंग स्टेशन से आने वाले सीवेज को एसटीपी में उपचारित किया जाता है। उपचारित पानी को यमुना में छोड़ा जाता है, जिससे नदी में पहुंचने वाले सीवेज के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार, एसटीपी का ट्रायल रन 25 मार्च से चल रहा है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका सौर ऊर्जा प्रणाली है। यह जिले का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसे ग्रिड बिजली से अलग रखकर संचालित किया जा रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन होने के कारण प्लांट के संचालन में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी।
सौर ऊर्जा का महत्व
सौर ऊर्जा की अनुपलब्धता या किसी आकस्मिक स्थिति में प्लांट बंद न हो, इसके लिए बैटरी बैकअप की व्यवस्था की गई है। हालांकि, सोलर सिस्टम की स्थापना से संबंधित कुछ कार्य अभी बाकी हैं। इन्हें पूरा करने के बाद प्लांट का नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था से सीवेज शोधन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यमुना किनारे बसे वृंदावन में बड़ी संख्या में नालों का पानी नदी तक पहुंचता है। ऐसे में 13 एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट से सीवेज का उपचार यमुना की स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से, सौर ऊर्जा पर आधारित संचालन इसे पारंपरिक एसटीपी से अलग पहचान देता है।