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राजस्थान में धार्मिक स्थलों पर प्रशासनिक कार्रवाई: ओवैसी ने उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में चल रहे एंटी-एन्क्रोचमेंट अभियान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीकानेर, फलोदी, जैसलमेर और बाड़मेर में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और स्थानीय नागरिकों की स्थिति क्या है।
 

राजस्थान में एंटी-एन्क्रोचमेंट अभियान पर विवाद


जयपुर: राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में चल रहे एंटी-एन्क्रोचमेंट अभियान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई को 'भेदभावपूर्ण और लक्षित' बताते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बीकानेर, फलोदी, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रूप से धार्मिक स्थलों, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है। ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।


सोशल मीडिया पर ओवैसी की चिंताएं

ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंताओं को साझा करते हुए कहा कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को जानबूझकर गिराया जा रहा है। उन्होंने AIMIM बीकानेर के जिला अध्यक्ष शफी जमील कासमी से इस विषय पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की है। उनके अनुसार, बीकानेर में चार मस्जिदें और फलोदी, जैसलमेर तथा बाड़मेर में कुल मिलाकर नौ धार्मिक स्थल ध्वस्त किए जा चुके हैं।


There has been a wave of demolitions targeting mosques, dargahs, and other Muslim religious sites across Rajasthan’s border districts of Bikaner, Phalodi, Jaisalmer, and Barmer.

I spoke to AIMIM Bikaner District President Shafi Jameel Qasmi, who stated that four mosques in…

— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) June 21, 2026



जैसलमेर की ऐतिहासिक दरगाह पर कार्रवाई

ओवैसी ने बताया कि कई अन्य धार्मिक स्थलों को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें जैसलमेर के रामगढ़-तनोट बाईपास रोड पर स्थित हजरत महमूद शाह जिलानी की लगभग 250 साल पुरानी दरगाह भी शामिल है।


स्थानीय नागरिकों की स्थिति

AIMIM प्रमुख ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर की जा रही इन कार्रवाइयों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन ध्वस्तीकरण को 'नेशनल सिक्योरिटी' का बहाना बनाकर सही ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि स्थानीय नागरिक कभी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं रहे हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि केवल मुस्लिम इबादतगाहों को ही निशाना बनाया जा रहा है।


केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग

प्रशासन का कहना है कि कुछ निर्माण अवैध रूप से किए गए हैं। वहीं, जिन मामलों में यह प्रमाणित है कि निर्माण निजी संपत्ति पर हुआ है, वहां प्रशासन अनुमति की कमी का हवाला दे रहा है। ओवैसी ने इसे 'भेदभावपूर्ण और गैर-कानूनी टारगेटेड डेमोलिशन' बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि इस एकतरफा कार्रवाई को रोका जा सके।