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राधाष्टमी महोत्सव: वृंदावन के चन्द्रोदय मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम

वृंदावन के चन्द्रोदय मंदिर में राधाष्टमी महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रों के बीच ठाकुरजी का अभिषेक किया गया और मंदिर को खूबसूरत सजावट से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति में लीन होकर हरिनाम संकीर्तन और भजन-संध्या में भाग लिया। जानें इस भव्य उत्सव की विशेषताएँ और राधारानी के प्रेम का महत्व।
 

वृंदावन में राधाष्टमी का भव्य उत्सव


वृंदावन: चन्द्रोदय मंदिर में राधाष्टमी का महापर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्रीराधारानी के प्रकट होने के उत्सव पर मंदिर में वैदिक मंत्रों के बीच श्रीराधा-वृंदावन चंद्र का महाभिषेक किया गया। इस आयोजन में फूल बंगला, विशेष श्रृंगार, झूलन उत्सव, छप्पन भोग, हरिनाम संकीर्तन और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।


मंदिर की सजावट और ठाकुरजी का अभिषेक

राधाष्टमी के इस खास मौके पर मंदिर परिसर को खूबसूरत पुष्प सज्जा और विद्युत रोशनी से सजाया गया। वैदिक मंत्रों के बीच पंचामृत, फलों के रस, सुगंधित द्रव्यों, औषधीय सामग्री और पुष्पों से ठाकुरजी का अभिषेक किया गया। इसके बाद श्रीराधा-वृंदावन चंद्र को रेशमी परिधानों और आभूषणों से सजाया गया। श्रद्धालुओं की भीड़ फूल बंगले और झूलन उत्सव के दर्शन के लिए उमड़ पड़ी।


राधारानी का प्रेम और भक्ति का महत्व

मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने बताया कि श्रीराधारानी भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति और शुद्ध प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं। गौड़ीय वैष्णव परंपरा में राधारानी को महाभाव स्वरूप माना जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीराधा की सेवा और उनके चरणों का अनुसरण भक्त को श्रीकृष्ण की शुद्ध भक्ति और निष्काम प्रेम की ओर ले जाता है। गुरु और श्रीकृष्ण की कृपा से ही जीव को भक्ति का मार्ग प्राप्त होता है।


भक्तिरस में डूबा मंदिर परिसर

इस महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में अखंड हरिनाम संकीर्तन और भजन-संध्या का आयोजन किया गया। महामंत्र के सामूहिक संकीर्तन से पूरा परिसर भक्तिरस में डूबा रहा। झूलन उत्सव और विशेष आरती के दौरान राधे-राधे के जयघोष से मंदिर गुंजायमान हो उठा। मथुरा, आगरा, दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, भरतपुर, फरीदाबाद और गुरुग्राम समेत विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आरती में भाग लिया और सुख-शांति एवं श्रीकृष्ण भक्ति की कामना की।