राम मंदिर चोरी मामले में अर्जुन देव की भूमिका पर उठे सवाल, SIT ने पेश की रिपोर्ट
लखनऊ में राम मंदिर चोरी की जांच
लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि चढ़ावे की राशि की गिनती करने वाले कक्ष में सीसीटीवी निगरानी में गंभीर कमियां पाई गई हैं। इस कारण पुलिस के वायरलेस विभाग के अधिकारी अर्जुन देव भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
अर्जुन देव की जिम्मेदारियां
सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे के नोटों की गिनती करने वाले स्थान पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी अर्जुन देव के पास थी। SIT का मानना है कि सुरक्षा से संबंधित इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के बावजूद, वे अन्य प्रशासनिक और ट्रस्ट से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर परिसर में वीवीआईपी दर्शन व्यवस्था और प्रबंधन में उनकी भागीदारी सामान्य जिम्मेदारियों से अधिक थी।
2009 से अयोध्या में तैनात
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अर्जुन देव 2009 से अयोध्या में तैनात हैं। इस दौरान उनके कई बार तबादले के आदेश जारी हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से वे लागू नहीं हो सके। हाल ही में लखनऊ के लिए जारी स्थानांतरण आदेश भी निरस्त कर दिया गया था। SIT ने अपनी रिपोर्ट में इस लंबे कार्यकाल और उससे जुड़े तथ्यों का भी उल्लेख किया है।
अधिकारियों की विस्तृत जांच
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के साथ अर्जुन देव के करीबी संबंध होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी का मानना है कि सुरक्षा से जुड़े पदों पर कार्यरत अधिकारियों की अतिरिक्त प्रशासनिक भूमिका और प्रभाव की भी विस्तृत जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस कारण मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी या नहीं।
फिलहाल, SIT ने अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी है। रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां अब सभी तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष और किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी का निर्धारण विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।