राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को दी क्लीन चिट
लखनऊ में राम मंदिर दान चोरी की जांच में बड़ी राहत
लखनऊ: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी से संबंधित मामले में जांच एजेंसी ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शासन को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई है। इस रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों का नाम आरोपी के रूप में नहीं है। यह रिपोर्ट अब उत्तर प्रदेश सरकार को आगे की प्रक्रिया के लिए ट्रस्ट को सौंप दी गई है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट में केवल उन आठ व्यक्तियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें पहले ही पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।
अनिल मिश्रा को SIT की क्लीन चिट
एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि मंदिर में दान चोरी की घटनाएं हुई थीं। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट ने पुलिस को औपचारिक सूचना दिए बिना ही लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी की थी। चंपत राय और अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा। रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को गिरफ्तार किया।
राम मंदिर दान चोरी मामला
राम मंदिर परिसर में दान राशि चोरी का मामला तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सार्वजनिक रूप से उठाया। प्रारंभ में चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर इन आरोपों को बेबुनियाद बताया, लेकिन विपक्षी दलों के हमले जारी रहे। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी चंपत राय पर जमीन खरीद से जुड़े मामलों में आरोप लगाए। राजनीतिक दबाव के बीच, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद जांच की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया। इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार शामिल थे।
CCTV में कैद हुई चोरी की घटनाएं
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। इनमें कर्मचारियों द्वारा लगभग 70 बार नकदी छिपाने की संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की गईं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि दान प्रबंधन के दौरान ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। मंदिर के प्रवेश और निकास द्वारों पर तैनात कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की नियमित तलाशी न लेना भी सुरक्षा में बड़ी चूक थी।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए एसआईटी को निष्पक्षता और तेजी से जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों की पीठ ने कहा है कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश करेगी। अदालत का मानना है कि इस रिपोर्ट के बाद श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के प्रबंधन और सुरक्षा में सुधार के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। अदालत ने रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ताओं को सुझाव देने की अनुमति दी है। हालांकि राज्य सरकार की एसआईटी ने पूर्व पदाधिकारियों को राहत दी है, लेकिन शीर्ष अदालत की निगरानी में जारी जांच पर देश की नजरें टिकी हुई हैं।