☰
×

रामलीला में राजा दशरथ का वनवास: एक ऐतिहासिक मंचन की झलक

रतिया में शक्ति नाटक क्लब द्वारा आयोजित रामलीला के पांचवे दिन राजा दशरथ ने भगवान श्री राम के राज्याभिषेक की तैयारी की। इस दौरान कैकेयी के कठोर निर्णय के चलते राम को 14 वर्षों के वनवास पर भेजा गया। राजा दशरथ की पुत्र वियोग में मृत्यु का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया और अंत में मुख्य अतिथियों को सम्मानित किया गया। जानें इस ऐतिहासिक मंचन के बारे में और भी जानकारी।
 

रामलीला का पांचवां दिन: दशरथ का वचन और राम का वनवास


रतिया: शक्ति नाटक क्लब द्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा ग्राउंड, शक्ति नगर में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के पांचवे दिन राजा दशरथ ने भगवान श्री राम के राज्याभिषेक की तैयारी की। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी कैकई को दिए गए दो वचनों के अनुसार भगवान श्री राम को 14 वर्षों के वनवास पर भेजने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, भगवान श्री राम के अयोध्या से प्रस्थान करने के बाद राजा दशरथ की पुत्र वियोग में मृत्यु का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया।


मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

रामलीला के इस दिन के मुख्य अतिथि पूजा एंपोरियम के संचालक अशोक मदान और आपार इंसा थे। इसके अलावा, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष राजकुमार सिंगला, केशव गोवर्धन गौशाला के प्रधान विद्या सागर बाघला, प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्रवण स्वामी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।


राज्याभिषेक की घोषणा और कैकेयी का कठोर निर्णय

राजा दशरथ ने राम के राजतिलक की घोषणा की और भगवान राम ने अपने पिता से कहा, "पिताश्री! आपके आदेश का पालन करना मेरा परम धर्म है।" लेकिन कथा में एक महत्वपूर्ण मोड़ आता है जब कैकेयी अपने कठोर निर्णय पर अडिग रहती हैं। राजा दशरथ उनसे विनती करते हैं, लेकिन वह अपनी मांग वापस नहीं लेतीं।


श्रीराम का वन गमन और दशरथ की मृत्यु

जब श्रीराम को वनवास का समाचार मिलता है, तो वह अपने पिता का वचन निभाने के लिए खुशी-खुशी वन जाने का निर्णय लेते हैं। वह सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या से प्रस्थान करते हैं, लेकिन उनके वियोग में राजा दशरथ की मृत्यु हो जाती है।


मुख्य अतिथियों का सम्मान

रामलीला के इस दिन के समापन पर मुख्य अतिथियों को शक्ति नाटक क्लब के कमेटी प्रधान राजेश सेतिया और अन्य सदस्यों द्वारा पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।