×

रेवाड़ी में बांझपन के इलाज में सफलता: बिरला फर्टिलिटी सेंटर का कमाल

हरियाणा के रेवाड़ी में बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर ने बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। 17 साल बाद एक दंपति ने संतान सुख पाया, जब विशेषज्ञों ने उनकी जटिल चिकित्सा समस्या का समाधान किया। जानें इस अद्भुत चिकित्सा प्रक्रिया के बारे में और कैसे आधुनिक तकनीक ने उनकी जिंदगी बदल दी।
 

रेवाड़ी में बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए खुशखबरी

रेवाड़ी . हरियाणा के रेवाड़ी और आस-पास के क्षेत्रों में बांझपन की समस्या से ग्रस्त दंपतियों के लिए एक सुखद समाचार आया है। रेवाड़ी स्थित बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर ने उन्नत चिकित्सा और सटीक परीक्षण के माध्यम से अपने सफल संचालन के तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अस्पताल ने अपनी तीसरी वर्षगांठ पर एक ऐसा चिकित्सा चमत्कार किया है, जिसने दक्षिण हरियाणा के सामान्य परिवारों में नई आशा का संचार किया है।


17 साल बाद दंपति के घर गूंज उठी किलकारी

एक स्थानीय दंपति, जो वर्षों तक अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, के घर 17 साल बाद आखिरकार खुशियों की दस्तक हुई है। 43 वर्षीय महिला पिछले 17 वर्षों से बांझपन का सामना कर रही थी। इस दंपति ने संतान सुख की चाह में कई आईवीएफ सेंटरों में लाखों रुपये खर्च किए और विभिन्न उपचारों का सहारा लिया, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी।


जटिल केस का समाधान

डॉक्टरों की टीम ने ऐसे सुलझाया जटिल केस


लगातार असफलताओं के बाद, दंपति ने रेवाड़ी के बिरला फर्टिलिटी सेंटर का रुख किया। यहां की विशेषज्ञ डॉ. प्राची बेनारा और डॉ. नंदिनी जैन की टीम ने महिला की गहन जांच की, जिसमें एक गंभीर चिकित्सा समस्या का पता चला। डॉक्टरों ने देखा कि महिला के गर्भाशय में गंभीर चिपकाव (Adhesions) हो गए थे।


आधुनिक चिकित्सा का प्रभाव

पीआरपी थेरेपी और आधुनिक तकनीक का कमाल


बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. प्राची बेनारा ने बताया कि उनकी टीम ने सबसे पहले 'हिस्टेरोस्कोपी' के माध्यम से गर्भाशय के चिपकाव को सावधानीपूर्वक हटाया और उसकी संरचना को सामान्य किया।


इसके बाद, गर्भाशय की परत को मजबूत करने के लिए महिला को प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी थेरेपी) दी गई। सभी चिकित्सा प्रक्रियाओं और सही समय का ध्यान रखते हुए, फ्रीज किया गया भ्रूण सफलतापूर्वक ट्रांसफर किया गया। इस आधुनिक उपचार का परिणाम यह रहा कि महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। अब दक्षिण हरियाणा के लोगों को गंभीर मामलों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।