वाराणसी में आधी रात को प्रशासन ने ध्वस्त की मस्जिद और मजार, जानें पूरी कहानी
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
वाराणसी: वाराणसी में मंगलवार की रात प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए काशी रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित पुरानी 'अजगैब शहीद मजार' और उसके पास की मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई आधी रात के समय शुरू हुई और इसे भारी सुरक्षा के बीच अंजाम दिया गया। बताया गया है कि इस स्थान पर भविष्य में एक मॉडल रेलवे स्टेशन का विकास किया जाना है।
सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण
इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। बुलडोजर की सहायता से मजार और मस्जिद को हटाया गया और रात में ही मलबे को साफ कर दिया गया। इस भूमि को लेकर विवाद पिछले दो वर्षों से न्यायालय में चल रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा इंतजाम
कार्रवाई से पहले एसीपी शिवहरी मीणा अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और क्षेत्र का निरीक्षण किया। इसके बाद मस्जिद के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई और तीन बुलडोजर मौके पर बुलाए गए।
जब ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, उस समय पुलिस और पीएसी के सैकड़ों जवान तैनात थे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।
विवादित ढांचे का इतिहास
अवैध मस्जिद तोड़कर
— Deepak Sharma (@SonOfBharat7) June 3, 2026
मलबा भी उठा ले गया रेलवे प्रशासन 🚨
वाराणसी में आधी रात अचानक बुलडोजर गरजने लगे, और रेलवे की जमीन पर बनी
अवैध मस्जिद को मिट्टी में मिला डाला....
इतना ही नहीं 200 जवानों के साथ पंहुचें
प्रशासन ने मलबा भी रातों रात उठाकर सुबह
तक अपनी जमीन समतल कर दी✍️ pic.twitter.com/ofjlczASum
विवाद का कारण
राजघाट स्थित काशी रेलवे स्टेशन परिसर में 'अजगैब शहीद मजार', मस्जिद और कब्रिस्तान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि मस्जिद का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है।
हालांकि, प्रशासन का कहना था कि यह भूमि रेलवे की है और समय के साथ यहां अतिक्रमण कर मजार का निर्माण किया गया। बाद में उसी क्षेत्र में मस्जिद और कब्रिस्तान भी विकसित हो गए। प्रशासन के अनुसार, परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर को भी पहले हटाया जा चुका था।
मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना का प्रभाव
परियोजना के तहत कार्रवाई
वर्ष 2024 में काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना की योजना तैयार होने के बाद भूमि की पैमाइश कराई गई। इसी दौरान रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया।
इसके बाद रेलवे प्रशासन ने संबंधित पक्षों को भूमि खाली करने के लिए कहा। मामला अदालत तक पहुंचा, जहां हाल ही में मजार पक्ष को राहत नहीं मिली और फैसला उनके खिलाफ गया।
नोटिस के बावजूद कार्रवाई
भूमि खाली करने का नोटिस
अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे की ओर से भूमि खाली करने का नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर जमीन खाली नहीं की गई।
इसके बाद प्रशासन ने मंगलवार की रात कार्रवाई करते हुए मजार और मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में रात में ही मलबा हटाकर क्षेत्र को खाली करा लिया गया।