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संत प्रेमानंद का अचानक आगमन: वृंदावन में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

संत प्रेमानंद का अचानक श्रीराधा केलिकुंज आश्रम में आगमन भक्तों के लिए खुशी का कारण बना। उनके दर्शन के लिए हजारों अनुयायी इकट्ठा हुए। इस दौरान, आश्रम में पूजा और सत्संग का आयोजन हुआ। संत ने अपने गुरु से आशीर्वाद लेने के बाद यमुना विहार कुंज के लिए प्रस्थान किया। शिष्य की मृत्यु के बाद आश्रम में चल रहे विवादों और चर्चाओं के बीच संत का यह आगमन चर्चा का विषय बना रहा।
 

संत प्रेमानंद का आगमन


वृंदावन: लंबे समय के बाद संत प्रेमानंद गुरुवार की सुबह अचानक श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पहुंचे। जैसे ही उनके आगमन की खबर फैली, आश्रम के बाहर भक्तों की भीड़ लग गई। देखते ही देखते हजारों अनुयायी संत के दर्शन के लिए केलिकुंज के बाहर इकट्ठा हो गए। संत ने लगभग आधे घंटे आश्रम में बिताने के बाद यमुना पार जहांगीरपुर गांव के यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए प्रस्थान किया।


पूजा और गुरु का आशीर्वाद

पूजा-सत्संग और गुरु से आशीर्वाद 


संत प्रेमानंद सुबह लगभग साढ़े पांच बजे श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे। उनके अचानक आगमन से वहां उपस्थित भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई। आश्रम में करीब 15 मिनट तक पूजा और सत्संग के बाद, वे अपने गुरु गौरांगी शरण के आश्रम गए। वहां उन्होंने लगभग 15 मिनट ध्यान किया और गुरु का आशीर्वाद लिया। इसके बाद, सुबह लगभग छह बजे, वे यमुना पार जहांगीरपुर गांव में नए आश्रम यमुना विहार कुंज के लिए रवाना हो गए।


विवाद और चर्चाएं

शिष्य की मौत के बाद विवाद और चर्चाएं  


शिष्य रसिक दुलारी शरण की मृत्यु के बाद, श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पर अपने बच्चों की तलाश में आए परिजनों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। इस स्थिति को देखते हुए संत प्रेमानंद के आश्रम पहुंचने की संभावना कम मानी जा रही थी। बच्चों की खोज में आए लोगों और आश्रम प्रबंधन के बीच विवाद और दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई थीं। इसके साथ ही, आश्रम के बारे में विभिन्न सूचनाएं और चर्चाएं सोशल मीडिया पर फैल रही थीं।


अनुयायियों का उत्साह

अनुयायियों में उत्साह और दिनभर चर्चा  


गुरुवार सुबह संत प्रेमानंद के अचानक श्रीराधा केलिकुंज पहुंचने के बाद उनके अनुयायियों में उत्साह का माहौल था। उनके आगमन की सूचना तेजी से फैलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम के बाहर एकत्र हो गए। संत के आधे घंटे के प्रवास के दौरान भक्त दर्शन की आस में बाहर खड़े रहे। इसके बाद, संत अपने गुरु से आशीर्वाद लेकर यमुना विहार कुंज के लिए रवाना हो गए। उनके इस अचानक आगमन को लेकर आश्रम और अनुयायियों के बीच दिनभर चर्चा होती रही।