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सड़क पर बिना बीमा के दौड़ रहे वाहनों की alarming स्थिति

हाल ही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश की सड़कों पर लगभग 44 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। यह स्थिति सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस alarming स्थिति का खुलासा किया है। जानें, बिना बीमा के वाहन चलाने के कानूनी प्रावधान और हादसे की स्थिति में मुआवजे की प्रक्रिया क्या है। क्या सरकार इस समस्या का समाधान कर पाएगी? पढ़ें पूरी जानकारी।
 

नई दिल्ली में सड़क सुरक्षा का गंभीर मुद्दा

नई दिल्ली: सड़क पर चलने वाली हर गाड़ी केवल एक लोहे की मशीन नहीं है, बल्कि इसके साथ नियमों का पालन और दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। लेकिन देश की सड़कों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों ऐसे वाहन हैं जो बिना किसी वैध बीमा के चल रहे हैं। यदि किसी दिन ऐसी गाड़ी से आपका एक्सीडेंट होता है, तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। अब सरकार ने संसद में ऐसे चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जिन्होंने सबको चौंका दिया है।


राज्यसभा में 44 प्रतिशत का खतरनाक आंकड़ा

राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़े

हाल ही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश की सड़कों पर चलने वाले कुल वाहनों में से लगभग 44 प्रतिशत वाहन बिना किसी वैध बीमा के चल रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हर दो में से एक गाड़ी कानून का उल्लंघन कर रही है। यह गंभीर जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि ये आंकड़े 'वाहन (VAHAN)' डेटाबेस पर आधारित हैं, जो 6 मार्च 2026 तक सक्रिय वाहनों की जानकारी को दर्शाते हैं।


बिना बीमा गाड़ी चलाना एक गंभीर अपराध

कानूनी प्रावधान

1988 के मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए 'थर्ड पार्टी बीमा' होना अनिवार्य है। यदि कोई वाहन बिना बीमा के पकड़ा जाता है, तो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 196 के तहत उस पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद, पूरे देश में इस नियम का उल्लंघन हो रहा है। इस समस्या को देखते हुए सड़क परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई बार सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार अब डिजिटल वेरिफिकेशन जैसी नई तकनीकों पर जोर दे रही है ताकि ऐसे वाहनों की पहचान की जा सके।


हादसे की स्थिति में मुआवजे की प्रक्रिया

मुआवजे का दावा

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिना बीमा वाली गाड़ी से कोई गंभीर सड़क हादसा होता है, तो पीड़ित परिवार को मुआवजा कैसे मिलेगा। इस पर सरकार ने बताया है कि ऐसे मामलों में पीड़ित मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 164 या 166 के तहत मुआवजे का दावा कर सकते हैं। इसके अलावा, सेंट्रल मोटर व्हीकल नियमों में भी पीड़ितों की सहायता का प्रावधान है। मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के जरिए भी पीड़ितों को सहायता दी जाती है। इसी साल जनवरी 2026 में इस फंड के नियमों को अपडेट किया गया है, जिसमें बिना बीमा वाले वाहनों और हिट एंड रन मामलों के लिए अलग खाते बनाए गए हैं। 'पीएम राहत (PM RAHAT)' जैसी योजनाओं के माध्यम से भी घायलों के इलाज और मुआवजे की व्यवस्था की गई है।