सत्य पाल जैन को छठे कार्यकाल के लिए अपर महासालिसिटर नियुक्त किया गया
सत्य पाल जैन की पुनः नियुक्ति
यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2014 में चंडीगढ़ में इस पद को नए सिरे से स्थापित किया था। श्री जैन की पहली नियुक्ति 9 अप्रैल 2015 को तीन साल के लिए हुई थी। उनकी सेवाएं भारत सरकार के लॉ ऑफिसर्स के अंतर्गत आती हैं, जिसमें भारत के अटार्नी जनरल, महासालिसिटर और अपर महासालिसिटर शामिल हैं।
अपर महासालिसिटर के रूप में, श्री जैन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भारत सरकार के सभी मुकदमों के लिए लिटिगेशन इंचार्ज हैं। उच्च न्यायालय में लगभग 200 वकीलों का एक पैनल है, जिसमें डिप्टी एस. जी., सीनियर पैनल काउंसल और सेंट्रल गवर्नमेंट काउंसिल शामिल हैं, जो श्री जैन के अधीन काम करते हैं। वह इन वकीलों को मुकदमे आवंटित करते हैं और उनके बीच समान वितरण सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा, वह पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के जिला स्तर पर भी भारत सरकार के मुकदमों के इंचार्ज हैं।
श्री जैन एक प्रतिष्ठित संविधान विशेषज्ञ हैं और विभिन्न उच्च न्यायालयों एवं सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे लगभग 10 वर्षों तक पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रभारी और संयोजक रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने लिब्राहन आयोग में भी पार्टी का पक्ष रखा है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व उप-राष्ट्रपति वैंकया नायडू, लाल कृष्ण आडवाणी, स्वर्गीय सुषमा स्वराज, शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल जैसे कई वरिष्ठ नेताओं की पैरवी कर चुके हैं।
श्री जैन राष्ट्रपति चुनाव में श्री पी. ऐ. संगमा और श्री भैंरो सिंह शेखावत के चुनाव एजेंट भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह भारत सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के आभारी हैं कि उन्होंने उन्हें 11 वर्षों से अधिक समय तक इस संस्थान की सेवा करने का अवसर दिया।
श्री जैन अपने कॉलेज के दिनों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं।
श्री जैन 1996 और 1998 में चंडीगढ़ से लोकसभा का चुनाव भी जीत चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने 1976, 1980, 1984 और 1988 में लगातार चार बार ग्रैजुएट निर्वाचन क्षेत्र से पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट के सदस्य चुने गए और बाद में भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा 1996, 2000, 2004, 2008, 2012, 2016 और 2020 में इसी सीनेट का सदस्य नामित किया गया था।