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सिरमौर के 52 गांवों ने दहेज और फिजूलखर्ची के खिलाफ उठाया कदम

सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के 52 गांवों ने विवाह समारोहों में दहेज प्रथा और फिजूलखर्ची को समाप्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब बरात में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 100 से अधिक नहीं होगी, और शराब पर भी प्रतिबंध रहेगा। इस पहल का उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ को कम करना और पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित करना है।
 

सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय


हिमाचल प्रदेश समाचार: सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के 52 गांवों ने सामाजिक कुरीतियों और विवाह में अनावश्यक खर्च को समाप्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब विवाह समारोहों में शामिल होने वाले बरातियों की संख्या 100 से अधिक नहीं होगी। इसके साथ ही, दहेज प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध और दूल्हा-दुल्हन के नाचने पर पैसे देने की परंपरा को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।


बरात में शराब पर प्रतिबंध

बरात में शराब लाने और परोसने पर भी सख्त प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे 52 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा। यह निर्णय शिलाई गांव में माता ठारी के सांझा प्रांगण में खत के जेलदार दिनेश तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।


शादी में फिजूलखर्ची पर रोक

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च को कम किया जाए, ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो सके और पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित किया जा सके। प्रतिनिधियों ने सामाजिक आयोजनों में सादगी को बढ़ावा देने और अनावश्यक आर्थिक दबाव डालने वाली रस्मों को सीमित करने पर सहमति जताई।


बरात में अधिकतम 100 लोग

बैठक में यह तय किया गया कि शादी में बरातियों की संख्या 100 से अधिक नहीं होगी। लकड़ी कटाई की रस्म में भी केवल 20 से 25 लोग शामिल हो सकेंगे। इस अवसर पर अन्य मेहमानों को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, समारोह में मांस खाने की परंपरा को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया।


दहेज पर पूरी तरह रोक

खत के प्रतिनिधियों ने दहेज प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत केवल निर्धारित सोबो-पाईतो (बर्तन देने की परंपरा) को बनाए रखने की बात कही गई।


दुल्हन के लिए 5 गहने तय

निर्णय के अनुसार, दुल्हन के लिए कान के गहने, नाक का गहना, मंगलसूत्र, पैरों की पायल और चुटकी सहित पांच प्रकार के गहनों की सीमा तय की गई है। गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी यही सीमा लागू होगी।


नेवदा में 10 रुपये तय

नेवदा रस्म को पुरानी परंपरा के रूप में जारी रखने पर सहमति बनी। इसके तहत नेवदे के रूप में 10 रुपये और मामा के ढंग के रूप में 501 रुपये निर्धारित किए गए हैं। मामा के स्वागत की रस्म में भी बदलाव किया गया है।