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हरियाणा में 2 साल वेंटिलेटर पर रहने के बाद बच्चे की घर वापसी

हरियाणा के रोहतक में एक 8 वर्षीय बच्चा दक्ष, जो लगभग दो साल तक वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा, अब स्वस्थ होकर अपने घर लौट आया है। यह कहानी न केवल इंसानियत की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उम्मीद और विश्वास का जज्बा कभी बेकार नहीं जाता। दक्ष के पिता ने अपने बेटे के इलाज के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन अंततः उनकी मेहनत रंग लाई। जानिए इस प्रेरणादायक यात्रा के बारे में और कैसे मेडिकल स्टाफ ने इस बच्चे को नया जीवन दिया।
 

हरियाणा में इंसानियत की मिसाल

हरियाणा के रोहतक जिले से एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जिसमें एक 8 वर्षीय बच्चा दक्ष, जो लगभग दो साल तक आईसीयू और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा, अब स्वस्थ होकर अपने घर लौट आया है। यह घटना न केवल इंसानियत की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उम्मीद और विश्वास का जज्बा कभी बेकार नहीं जाता।


दक्ष को नया जीवन मिला

दक्ष को रोहतक के पीजीआईएमएस में लगभग 2 साल तक वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस अवसर पर मेडिकल स्टाफ की आंखों में आंसू थे। उसके पिता सोमबीर दहिया ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मिठाई बांटकर आभार व्यक्त किया।


बेहोशी की हालत में लाया गया

सोनीपत जिले के गढ़ी सिसाना गांव के निवासी दक्ष को 5 अक्टूबर 2024 को बेहोशी की हालत में पीजीआईएमएस लाया गया था। उसे तेज बुखार था और वह अपने अंगों को हिलाने में असमर्थ था। उपचार के बावजूद, उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उसे बाल गहन चिकित्सा इकाई में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।


डॉक्टरों ने नहीं छोड़ी उम्मीद

दक्ष लगभग 23 महीने तक 100 प्रतिशत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा। इस दौरान उसे लगातार फिजियोथेरेपी और न्यूट्रिशनल सपोर्ट दिया गया। मेडिकल टीम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार होता गया।


पिता ने छोड़ दिया टैक्स चलाना

दक्ष के पिता सोमबीर दहिया दिल्ली में टैक्सी चलाते थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। बेटे के लंबे इलाज के कारण उन्हें अपना काम छोड़कर लगभग दो साल तक पीजीआईएमएस में रहना पड़ा। उनकी पत्नी भी लगातार बेटे के पास रहीं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, परिवार ने बच्चे के इलाज के लिए अस्पताल में ही डेरा डाल लिया।


स्टाफ के परिवार का सदस्य बना

दक्ष लगभग दो साल तक पीकू के इंचार्ज डॉ. कुंदन मित्तल और उनकी टीम की देखरेख में रहा। लंबे समय तक अस्पताल में रहने के कारण वह मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के लिए परिवार के सदस्य जैसा बन गया। स्टाफ बच्चे और उसके परिजनों की जरूरतों का भी ध्यान रखता था।


अब घर पर हो सकेगी देखभाल

पीकू इंचार्ज डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि बच्चा अब स्थिर है और माता-पिता घर पर उसकी देखभाल कर सकते हैं। फॉलो-अप विजिट में उसकी स्थिति की निगरानी की जाएगी। जब दक्ष को लाया गया था, तब वह हाथ-पैर तक नहीं हिला पा रहा था, लेकिन अब वह अपने शरीर को हिला-डुला रहा है।


डिस्चार्ज के समय भावुक हुए स्टाफ

दक्ष के डिस्चार्ज के समय पीकू का पूरा मेडिकल स्टाफ भावुक हो गया। पिता सोमबीर दहिया ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के पैर छुए और केक काटकर बच्चे के नए जीवन की खुशी मनाई। उन्होंने कहा कि उनके लिए पूरी टीम भगवान से कम नहीं है।


पिता बोले- PGIMS हमारा दूसरा घर बना

सोमबीर दहिया ने कहा कि डॉ. कुंदन मित्तल और उनकी टीम हमारे लिए भगवान से कम नहीं हैं। उन्होंने दो साल तक मेरे इकलौते बच्चे को आईसीयू में संभाला और नया जीवन दिया। पीजीआईएमएस पिछले दो साल से हमारा दूसरा घर बन गया था।