हरियाणा में कृषि विकास के लिए नई प्रयोगशालाओं का आगाज़: किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
हरियाणा में कृषि क्षेत्र में नई पहल
हरियाणा: हरियाणा सरकार ने किसानों की आय में वृद्धि और कृषि को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति का सही आकलन करने के लिए 52 नई नाइट्रोजन परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से लगभग 12 लाख किसानों की भूमि के नमूनों की जांच की जाएगी, जिससे उन्हें फसलों के लिए आवश्यक यूरिया की सही मात्रा का ज्ञान प्राप्त होगा। इससे न केवल खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, सरकार ने विभिन्न विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्यभर में 52 नाइट्रोजन परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना की योजना को स्वीकृति दी गई। इन प्रयोगशालाओं में किसानों की भूमि के नमूनों की जांच की जाएगी, जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि खेत में कितनी मात्रा में यूरिया का उपयोग करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इस पहल से किसानों को संतुलित खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
1468 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मिली मंजूरी
बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 32 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनकी अनुमानित लागत 1468 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में राजस्व, कृषि, कौशल विकास, बिजली निगम, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और शहरी विकास से जुड़े कई कार्य शामिल हैं। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा, सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना
राज्य सरकार अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने की योजना बना रही है। किसानों को रासायनिक खेती के विकल्पों और प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में जागरूक किया जाएगा। इस अभियान में मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक विभिन्न जिलों में जाकर किसानों से संवाद करेंगे। विशेष रूप से पंचकूला जिले के मोरनी क्षेत्र में लगभग 4000 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है। सरकार का उद्देश्य किसानों को कम लागत और बेहतर उत्पादन वाली खेती की ओर प्रेरित करना है।
राजस्व मामलों और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी
बैठक में राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए राजस्व कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा कौशल्या डैम के सुदृढ़ीकरण, रोहतक क्षेत्र में भालोठ सब ब्रांच के पुनर्निर्माण, हिसार एयरपोर्ट के लिए कच्चे पानी की आपूर्ति हेतु पंपिंग स्टेशन और राणा डिस्ट्रीब्यूटरी निर्माण जैसे कार्यों को भी स्वीकृति मिली। पंचकूला में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नई ड्रेनेज लाइन बनाई जाएगी। वहीं कालका-पिंजौर शहरी क्षेत्र के सेक्टर-29 में 10 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।
सिरसा, अंबाला और रेवाड़ी में विकास कार्य
सरकार ने सिरसा, अंबाला और रेवाड़ी जिलों में कई महत्वपूर्ण जल एवं सीवरेज परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। सिरसा में नए बूस्टिंग स्टेशन, पाइपलाइन विस्तार, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही शहर में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए जल भंडारण टैंक और बूस्टिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। अंबाला में 60 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा और जलभराव वाले क्षेत्रों में नई ड्रेनेज व्यवस्था विकसित की जाएगी। वहीं रेवाड़ी में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए जल परियोजनाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा होडल क्षेत्र में भी पाइपलाइन क्षमता बढ़ाने और सीवर नेटवर्क मजबूत करने के प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है।