हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: दिव्यांग कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र में बदलाव
हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों के लिए नया नियम
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं। अब 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके दिव्यांग कर्मचारियों को तुरंत सेवा से मुक्त किया जाएगा।
कानूनी राय और कोर्ट के फैसलों पर आधारित निर्णय
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों तथा महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर लिया गया है। पहले कुछ दिव्यांग कर्मचारियों को 60 वर्ष तक नौकरी में बने रहने की अनुमति थी। लेकिन 3 फरवरी 2026 को हरियाणा सिविल सेवा सामान्य नियम 2016 के नियम 143 में संशोधन कर यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया।
हालांकि, कई कर्मचारी कोर्ट के अंतरिम आदेशों के कारण 58 वर्ष के बाद भी अपनी नौकरी जारी रखे हुए थे। वित्त विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2025 के निर्णय का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने के बाद अंतरिम आदेशों के तहत नौकरी जारी रखना कानून और सार्वजनिक नीति के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने भी सरकार के संशोधन को सही ठहराया।
हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश: 60 वर्ष तक सेवा का अधिकार नहीं
10 मार्च 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संशोधन के बाद कोई भी दिव्यांग कर्मचारी 60 वर्ष तक सेवा का दावा नहीं कर सकता। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों ने अंतरिम आदेश के तहत 58 वर्ष के बाद काम किया, उन्हें उस अवधि का वेतन, पेंशन और अन्य लाभ मिलेंगे।
तत्काल कार्रवाई के निर्देश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 58 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग कर्मचारियों को तुरंत कार्यमुक्त किया जाए। लंबित मामलों में सरकार कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर अंतरिम आदेश हटाने की अर्जी भी दाखिल करेगी।
नियम में बदलाव के कारण
1. नियम 143 में संशोधन के बाद सेवा आयु पर स्पष्टता आवश्यक थी।
2. कोर्ट के अंतरिम आदेशों से प्रशासनिक उलझन बढ़ रही थी।
3. सभी कर्मचारियों के लिए समान रिटायरमेंट नीति लागू करना जरूरी था।
इस फैसले का प्रभाव
इस निर्णय के परिणामस्वरूप 58 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग कर्मचारी तुरंत रिटायर होंगे। इससे कई विभागों में पद रिक्त होंगे, जिससे नई भर्तियों का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही, लंबित कोर्ट मामलों में सरकार का पक्ष मजबूत होगा और सेवा नियमों को लेकर भ्रम समाप्त होगा।