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हांसी में रियल एस्टेट के लिए नए कलेक्टर रेट का प्रस्ताव

हरियाणा के हांसी जिले में रियल एस्टेट और भूमि लेन-देन के नियमों में बदलाव होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने कलेक्टर रेट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है, जिससे रजिस्ट्री शुल्क और भूमि की कीमतें बढ़ने की संभावना है। इस प्रस्ताव का सबसे अधिक प्रभाव नेशनल हाईवे और कुतुबपुर बेल्ट पर पड़ेगा, जहां कृषि भूमि की कीमतें 26 लाख से 39 लाख रुपये प्रति एकड़ तक बढ़ने की योजना है। जानें इस बदलाव का रियल एस्टेट बाजार पर क्या असर पड़ेगा।
 

हांसी में रियल एस्टेट की नई दिशा

हांसी. हरियाणा के नए जिले हांसी में रियल एस्टेट और भूमि लेन-देन के नियमों में बदलाव होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने पहली बार कलेक्टर रेट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है और वर्ष 2026-27 के लिए नया ड्राफ्ट जारी किया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रजिस्ट्री शुल्क और सरकारी भूमि की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। प्रशासन का कहना है कि यह वृद्धि मौजूदा बाजार दरों और वास्तविक लेन-देन के बीच के अंतर को कम करने के लिए की जा रही है।


नेशनल हाईवे और कुतुबपुर बेल्ट में मूल्य वृद्धि

नेशनल हाईवे और कुतुबपुर बेल्ट में सबसे बड़ा उछाल


नए प्रस्ताव के अनुसार, सबसे अधिक प्रभाव उन भूमि पर पड़ेगा जो नेशनल हाईवे या प्रमुख लिंक रोड के निकट स्थित हैं। कुतुबपुर-हांसी रोड के पास कृषि भूमि की कीमत में क्रांतिकारी बदलाव की योजना है, जहां मौजूदा 26 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर को बढ़ाकर 39 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, ढाणा और उसके आसपास के विकसित क्षेत्रों में भी 20 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि का सुझाव दिया गया है। इन क्षेत्रों को अब 'प्रीमियम जोन' के रूप में वर्गीकृत किया जा रहा है, जिसके चलते इनके सर्किल रेट में भारी संशोधन किया जा रहा है।


गांवों पर प्रभाव

शेखपुरा और उमरा सहित दर्जनों गांवों पर पड़ेगा असर


प्रशासन द्वारा तैयार की गई ड्राफ्ट रिपोर्ट में उमरा, कुतुबपुर, ढाणा, शेखपुरा और गंगवा जैसे प्रमुख गांवों की कृषि और आवासीय भूमि को शामिल किया गया है। जहां हाईवे के निकट क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है, वहीं सामान्य ग्रामीण क्षेत्रों और शेखपुरा के भीतरी हिस्सों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। अधिकारियों का मानना है कि इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और बढ़ती मांग के कारण भूमि की वास्तविक कीमतों में पहले से ही वृद्धि हो चुकी है, जिसे अब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है।


रजिस्ट्री और रियल एस्टेट पर प्रभाव

रजिस्ट्री और रियल एस्टेट बाजार पर सीधा प्रभाव


जिला प्रशासन ने इस ड्राफ्ट को संबंधित उच्च अधिकारियों और तहसीलदारों को भेज दिया है, जहां से आपत्तियों और सुझावों के निपटारे के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। एक बार नई दरें लागू होने के बाद, भूमि की रजिस्ट्री कराना महंगा हो जाएगा, जिससे हांसी के रियल एस्टेट बाजार में निवेश की लागत बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार के राजस्व में वृद्धि करेगा और भू-माफियाओं द्वारा कम दर पर रजिस्ट्री के खेल पर भी रोक लगाएगा।