2026 में बड़े मंगल का विशेष महत्व: जानें पूजा विधि और सावधानियाँ
धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वर्ष
कुरुक्षेत्र, 04 मई। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 धार्मिक दृष्टि से हरियाणा और उत्तर भारत के श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक समय होगा। इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। ज्येष्ठ मास के मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है, लेकिन इस बार अधिक मास के कारण इसकी महत्ता कई गुना बढ़ गई है।
अधिक मास का दुर्लभ संयोग
ज्योतिषियों के अनुसार, 17 मई से 15 जून 2026 तक अधिक मास रहेगा। इस कारण मुख्य ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ दोनों के मंगलवार मिलकर कुल 8 बड़े मंगल का योग बना रहे हैं। यह अद्भुत संयोग लगभग 19 वर्षों के बाद देखने को मिल रहा है, जो बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त करने का सुनहरा अवसर है।
पूजा में सावधानियाँ
हनुमान जी की पूजा में सात्विकता का विशेष महत्व है, इसलिए बड़े मंगल के दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। बजरंगबली सेवा और विनम्रता के प्रतीक हैं, इसलिए इस दिन क्रोध और अपशब्दों का त्याग करना अनिवार्य है। पूजा में काले रंग के वस्त्रों और लोहे की वस्तुओं के उपयोग से बचना चाहिए, इसके बजाय लाल या पीले वस्त्र धारण करना शुभ फलदायी होता है।
घर पर पूजा विधि
यदि आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। बजरंगबली के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता का चित्र जरूर रखें, क्योंकि राम जी के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। अभिषेक के लिए गंगाजल का प्रयोग करें और चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर अर्पित करें।
तुलसी दल का भोग
बजरंगबली को प्रसाद में बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू या शुद्ध घी का चूरमा चढ़ाना उत्तम है। विशेष ध्यान रखें कि हनुमान जी को चढ़ाए जाने वाले किसी भी भोग में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते हैं। पूजा के अंत में हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने के बाद आरती जरूर करें और अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
सेवा और दान का महत्व
हरियाणा के शहरों और गांवों में बड़े मंगल पर भंडारे लगाने की पुरानी परंपरा रही है। 2026 के इन 8 बड़े मंगलों पर जगह-जगह शरबत के स्टाल और प्यासे को पानी पिलाने का विशेष महत्व रहेगा। भूखों को भोजन कराने और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना इस ज्येष्ठ मास में अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।