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अक्षय तृतीया 2026: मां लक्ष्मी की कृपा पाने का विशेष दिन

अक्षय तृतीया 2026, जो 19 अप्रैल को मनाई जाएगी, मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा, सोने की खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष महत्व है। जानें इंद्रकृत महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ और इसके पीछे की पौराणिक कथा।
 

अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया 2026: यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जिसे 'स्वयं सिद्ध मुहूर्त' माना जाता है। अक्षय तृतीया 2026 का आयोजन 19 अप्रैल, रविवार को होगा। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा, सोने की खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह तिथि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस दिन माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा और स्तुति का प्रावधान है।


इंद्रकृत महालक्ष्मी अष्टकम

इंद्रकृत महालक्ष्मी अष्टकम:
देवराज इंद्र द्वारा रचित यह स्तोत्र, जिसे इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र भी कहा जाता है, अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को 'श्रीहीन' होने का श्राप दिया था, जो उनके अहंकार और भगवान विष्णु के प्रति अनादर के कारण था।

जब दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण स्वर्ग श्रीहीन हो गया, तब इंद्र ने माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस स्तोत्र की रचना की।


स्तोत्र का पाठ

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥१॥
(हे महामाया! आपको नमस्कार है। श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं द्वारा पूजित, हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको प्रणाम है।)

यह स्तोत्र ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड से लिया गया है। इंद्र ने दुर्वासा मुनि के श्राप के कारण श्रीहीन होने पर माता लक्ष्मी की स्तुति में इसका पाठ किया, जिससे उन्हें पुनः ऐश्वर्य प्राप्त हुआ। यह स्तोत्र धन, समृद्धि, यश और विजय पाने के लिए अचूक माना जाता है।


स्तोत्र का सार

सार: इस स्तोत्र में इंद्र ने मां लक्ष्मी को कमल निवासिनी, विष्णुप्रिया, सिद्ध, स्वाहा, स्वधा, विद्या और सौभाग्य की देवी के रूप में संबोधित किया है।