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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर नई Revelations

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। यह मामला महाकुंभ के बाद से शुरू हुआ और इसकी जानकारी कई शहरों तक पहुंच चुकी है। चंपत राय और विहिप के बीच संबंधों में खटास भी देखी जा रही है। एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए चोरी की पुष्टि हुई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि प्रति भक्त औसतन पांच रुपए का चढ़ावा दिखाया जा रहा है। नई व्यवस्था में विश्व हिंदू परिषद का अधिकार कितना रहेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
 

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की कहानी


अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस मामले में कई कहानियां उभरकर आ रही हैं, जो किसी थ्रिलर सीरियल से कम नहीं हैं। जानकारी के अनुसार, यह चोरी लगभग डेढ़ साल पहले महाकुंभ के बाद शुरू हुई थी, और इसकी जानकारी दिल्ली, लखनऊ और नागपुर तक पहुंच चुकी थी। संघ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को इस बारे में चेतावनी भी दी थी। हालांकि, चंपत राय का मानना था कि चूंकि मंदिर निर्माण का आंदोलन विश्व हिंदू परिषद द्वारा संचालित किया गया है, इसलिए यह उनकी संपत्ति है।


सूत्रों के अनुसार, विहिप के पालक अधिकारी भैयाजी जोशी और चंपत राय के बीच अच्छे संबंध नहीं हैं। भाजपा के नेताओं ने भी अनौपचारिक बातचीत में बताया है कि कैसे विहिप पर वैश्य समाज का प्रभाव बढ़ गया है। इस बीच, लखनऊ से एक स्टिंग ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी, जिसमें एक व्यक्ति को एक निश्चित राशि के साथ मंदिर भेजा गया। उसने दानपात्र में राशि डाली, लेकिन उस दिन का कुल चढ़ावा बैंक में जमा हुई राशि से कम था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि चोरी हो रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रति भक्त औसतन पांच रुपए का चढ़ावा मंदिर में दिखाया जा रहा है। अब यह देखना होगा कि नई व्यवस्था में विश्व हिंदू परिषद का कितना अधिकार रहेगा।