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असम के हाजो में श्री हयग्रीव माधव मंदिर: एक अद्वितीय धार्मिक स्थल

असम के हाजो में स्थित श्री हयग्रीव माधव मंदिर, भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की पूजा का एक प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर न केवल अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की अनोखी परंपराएं भी इसे खास बनाती हैं। भक्त यहां कछुए अर्पित करते हैं और बौद्ध अनुयायी भी इसे पवित्र मानते हैं। जानें इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और इसकी विशेषताएं, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं।
 

श्री हयग्रीव माधव मंदिर का परिचय

भारत के असम राज्य के कामरूप जिले में स्थित हाजो में भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जिसे श्री हयग्रीव माधव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के 'हयग्रीव' अवतार की पूजा की जाती है, जो घोड़े के सिर वाले रूप में प्रकट होते हैं। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यह मणिकूट पर्वत पर स्थित है और हिंदू तथा बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सदियों से आस्था का केंद्र रहा है। यहां श्रद्धालु भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कछुए का चढ़ावा अर्पित करते हैं।


मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान विष्णु के 'हयग्रीव' अवतार की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि भगवान श्रीहरि विष्णु ने इस स्थान पर मधु और कैटभ राक्षसों का वध किया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1583 में कोच राजा रघुदेव नारायण द्वारा किया गया था, जबकि कुछ का मानना है कि यह एक प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण है। मंदिर की दीवारों पर हाथियों और अन्य पौराणिक आकृतियों की सुंदर नक्काशी की गई है।


कछुए अर्पित करने की परंपरा

इस मंदिर की एक विशेषता 'माधव पुखुरी' नामक तालाब है, जिसमें दुर्लभ प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए या भगवान को श्रद्धा अर्पित करने के लिए कछुओं को भोजन कराते हैं या तालाब में छोड़ते हैं। कछुओं को भगवान का एक रूप माना जाता है, और स्थानीय लोग इनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं।


बौद्ध धर्म से संबंध

इस मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां हिंदू धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ बौद्ध अनुयायी भी आते हैं। तिब्बती बौद्धों का मानना है कि यह वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए, बौद्ध समुदाय इसे 'महामुनी' का मंदिर मानता है।


संस्कृति और संरक्षण

श्री हयग्रीव माधव मंदिर संस्कृति, धर्म और वन्यजीव संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहां की शांति और सदियों पुरानी परंपराएं इसे भारत के अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं। यदि आप असम की यात्रा करते हैं, तो हाजो के इस अद्भुत मंदिर के दर्शन करना एक अविस्मरणीय अनुभव हो सकता है।