आदि शंकराचार्य जयंती 2026: अद्वैत वेदांत के महान प्रचारक का उत्सव
आदि शंकराचार्य जयंती का महत्व
आदि शंकराचार्य जयंती 2026: सनातन धर्म में अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक और चार मठों के संस्थापक आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, यह उत्सव मंगलवार, 21 अप्रैल को मनाया जाएगा। विद्वान उन्हें भगवान शिव का अवतार मानते हैं, जो कलियुग के पहले चरण में अपने चार शिष्यों के साथ जगदगुरु आचार्य शंकर के रूप में प्रकट हुए।
आदि गुरु शंकराचार्य को सनातन धर्म के इतिहास में सबसे महान ऋषियों में से एक माना जाता है। उनका जन्म केरल के कलाडी क्षेत्र में हुआ था, और उन्होंने 32 वर्ष की आयु में इस संसार को छोड़ दिया। उन्होंने अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों का पालन करते हुए हिंदू संस्कृति को तब संरक्षित किया, जब इसकी सबसे अधिक आवश्यकता थी।
बारह शताब्दी पूर्व, महान आचार्य ने उपनिषदों के अद्वैत दर्शन का प्रचार करते हुए पूरे देश का भ्रमण किया। उन्होंने भारत की चार दिशाओं में चार आम्नाय पीठों की स्थापना की, जिनमें ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम, श्रृंगेरी पीठ, द्वारिका शारदा पीठ और पुरी गोवर्धन पीठ शामिल हैं। कहा जाता है कि आठ वर्ष की आयु में उन्होंने चार वेदों का ज्ञान प्राप्त किया, बारह वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों का ज्ञान हासिल किया, और सोलह वर्ष की आयु में उपनिषदों पर भाष्य लिखा।
आदि शंकराचार्य ने भगवद् गीता और ब्रह्म सूत्र पर शंकर भाष्य के साथ-साथ ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक और छान्दोग्योपनिषद् पर भी भाष्य लिखा।