आमलकी एकादशी: जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व
आमलकी एकादशी का महत्व
जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
आमलकी एकादशी, नई दिल्ली: भगवान श्री हरि विष्णु को प्रसन्न करने का अवसर एकादशी का दिन होता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के लिए व्रत रखते हैं और उनकी पूजा विधिपूर्वक करते हैं। साल में 24 एकादशी आती हैं, जिनमें से हर एक का विशेष महत्व होता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि सच्चे मन से आमलकी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा की जाए, तो व्यक्ति के कर्ज, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। मृत्यु के बाद मोक्ष और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि 2026 में आमलकी एकादशी कब मनाई जाएगी, इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
आमलकी एकादशी कब है?
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को रात 12:33 बजे शुरू होगी और इसका समापन उसी दिन रात 10:32 बजे होगा। इस प्रकार, उदया तिथि के अनुसार आमलकी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजा की जाएगी।
आमलकी एकादशी पूजा विधि
आमलकी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। आंवले के वृक्ष के पास जाकर उसकी जड़ में जल अर्पित करें और धूप-दीप से आरती करें। यदि आंवले का वृक्ष पास नहीं है, तो भगवान विष्णु को आंवले का फल अर्पित करें। एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। पूजा का समापन आरती से करें।
आमलकी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, संसार की रचना के समय आंवले का पेड़ भी उत्पन्न हुआ। भगवान विष्णु ने कहा है कि आंवले की पूजा करने से सभी तीर्थों का फल प्राप्त होता है। काशी में इस दिन रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कर उन्हें काशी लाए थे। इस दिन बाबा विश्वनाथ को गुलाल चढ़ाया जाता है।