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आषाढ़ अमावस्या 2026: भौमवती अमावस्या के विशेष उपाय

आषाढ़ अमावस्या 2026, जो 14 जुलाई को मनाई जाएगी, का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों को तर्पण और दान का आयोजन किया जाता है। जानें भौमवती अमावस्या के दिन किए जाने वाले विशेष उपाय, जो जीवन में सुख और शांति लाने में मदद कर सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे हनुमान जी की पूजा और अन्य उपायों से आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
 

आषाढ़ अमावस्या का महत्व


आषाढ़ अमावस्या 2026, नई दिल्ली: सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। यह तिथि पितरों को समर्पित होती है, इसलिए इस दिन तर्पण और पिंडदान का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा, अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व होता है।


आषाढ़ माह की अमावस्या को आषाढ़ या आषाढ़ी अमावस्या कहा जाता है। जब यह तिथि मंगलवार को आती है, तो इसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख और शांति प्राप्त होती है।


भौमवती अमावस्या के उपाय


  • भौमवती अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों का तर्पण करें। तर्पण करते समय कहें कि, 'हे पितृ देव! मैं आपको जल से तृप्त कर रहा हूं, आप सभी तृप्त हों।' इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं, जिससे उन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं।

  • इस दिन स्नान के बाद हनुमान जी की पूजा करें और चालीसा का पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें। इससे मंगल और केतु के दोष दूर होते हैं।

  • हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग अर्पित करें और फिर इसे गरीबों में बांट दें। इससे हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • भौमवती अमावस्या की शाम हनुमान जी के मंदिर जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाएं। चमेली के तेल में पीला सिंदूर मिलाकर चोला बनाएं और हनुमान जी को चढ़ाएं। इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।

  • इस दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। इससे धन का संकट दूर होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है。