ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: सावन में शिव की आराधना का प्रमुख स्थल
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो मध्य प्रदेश में स्थित है, सावन के महीने में भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है, और तीर्थ यात्री यहां सभी तीर्थों का जल अर्पित करते हैं। इस मंदिर में तीन बार पूजा होती है, जिसमें विभिन्न पुजारी शामिल होते हैं। हर सोमवार को भगवान की भव्य मूर्ति का जुलूस निकाला जाता है, जो स्थानीय लोगों के लिए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। जानें ओंकारेश्वर के इतिहास और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।
Aug 8, 2026, 18:12 IST
ओंकारेश्वर का महत्व
सावन का महीना चल रहा है, और भक्तजन महादेव की पूजा में व्यस्त हैं। इस दौरान, कई श्रद्धालु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए निकलते हैं, जिनमें से एक प्रमुख स्थल ओंकारेश्वर है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण में मिलता है। यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित है, जो इंदौर से लगभग 77 किलोमीटर दूर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव यहां तीनों लोकों की यात्रा के बाद विश्राम करने आते हैं, इसलिए इस मंदिर में उनकी विश्राम व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए, हम आपको इसके इतिहास के बारे में बताते हैं।
ओंकारेश्वर के दर्शन का महत्व
ओंकारेश्वर के दर्शन अनिवार्य
हिंदू धर्म में सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन के बाद ओंकारेश्वर के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व है। तीर्थ यात्री यहां सभी तीर्थों का जल लेकर ओंकारेश्वर धाम में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं, तभी उनकी यात्रा पूर्ण मानी जाती है। अन्यथा, यह यात्रा अधूरी मानी जाती है।
मंदिर में आरती का समय
आरती का आयोजन
ओंकारेश्वर में कई मंदिर हैं, जो नर्मदा के दोनों तटों पर स्थित हैं। ओमकार पर्वत का परिक्रमा पथ लगभग 7 किलोमीटर लंबा है, जो पक्के सीमेंट से बना है। इस मार्ग पर मनमोहक दृश्य देखने को मिलते हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तीन बार पूजा होती है, जिसमें अलग-अलग पुजारी पूजा का आयोजन करते हैं। सुबह के समय ट्रस्ट के पुजारी, दोपहर में सिंधिया परिवार के पुजारी और शाम को होलकर स्टेट के पुजारी पूजा करते हैं।
हर सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर की तीन मुखों वाली सोने की मूर्ति को पालकी में रखकर जुलूस निकाला जाता है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोग एकत्र होते हैं।