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कामदा एकादशी: जानें व्रत की तिथि, पूजा विधि और महत्व

कामदा एकादशी का व्रत हर साल चैत्र माह में मनाया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसके माध्यम से भक्त ब्रह्महत्या और अन्य पापों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। जानें इस व्रत की तिथि, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में।
 

कामदा एकादशी का महत्व


कामदा एकादशी का व्रत ब्रह्महत्या और अन्य पापों से मुक्ति दिलाता है


सनातन धर्म में हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत का आयोजन किया जाता है। यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। हर एकादशी का व्रत अपने विशेष महत्व के लिए जाना जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे कामदा एकादशी कहा जाता है, का विशेष महत्व है।


कामदा एकादशी कब मनाई जाएगी?

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 28 मार्च को सुबह 08:48 बजे शुरू होगी और इसका समापन 29 मार्च को सुबह 07:46 बजे होगा। इस प्रकार, कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च को मनाया जाएगा।


कामदा एकादशी पूजा का मुहूर्त

कामदा एकादशी के दिन पूजा का मुहूर्त सुबह 7:48 बजे से शुरू होगा और यह दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा।


कामदा एकादशी पूजा विधि

कामदा एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।


भगवान को पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र, चंदन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, तिल, धूप-दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, पान, नारियल आदि अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और कामदा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें। पूजा के अंत में आरती करें।


कामदा एकादशी का महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत ब्रह्महत्या और अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति दिलाता है। यह पिशाचत्व जैसे दोषों को भी समाप्त करता है। इस एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का पुण्य प्राप्त होता है।