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कामाख्या देवी मंदिर का अंबुबाची मेला: रहस्य और आस्था का संगम

कामाख्या देवी मंदिर का अंबुबाची मेला हर साल जून में आयोजित होता है, जिसमें मां कामाख्या के मासिक धर्म के दौरान मंदिर बंद रहता है। इस बार यह मेला 22 जून 2026 से शुरू होगा। जानें इस मेले की विशेषताएं और मान्यताएं, जो इसे अद्वितीय बनाती हैं।
 

भारत की आध्यात्मिक धरोहर

भारत अपनी समृद्ध संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से हिंदू धर्म में कई अद्भुत चमत्कार देखने को मिलते हैं। यहां ऐसे कई मंदिर हैं जो अपने रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। इनमें से एक है असम में स्थित कामाख्या देवी मंदिर, जिसे एक दिव्य स्थल माना जाता है। हर वर्ष जून में यहां आध्यात्मिकता, आस्था और रहस्य का अनूठा मेल देखने को मिलता है, जिसे 'अंबुबाची मेला' के नाम से जाना जाता है। इस लेख में हम आपको इस मेले की तारीख और इसकी विशेषताओं के बारे में जानकारी देंगे।


मां का रहस्यमय दरबार

गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित मां कामाख्या का यह पवित्र स्थल हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक शिला की पूजा की जाती है, जिसका आकार योनि के समान है। मान्यता है कि देवी सती का योनि का भाग यहीं गिरा था, जिसके बाद यह शक्तिपीठ स्थापित हुआ।


अंबुबाची मेले की तिथियां

अंबुबाची मेला एक महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है, जो प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म से गुजरती हैं, इसलिए मंदिर के मुख्य दरवाजे को तीन दिनों के लिए बंद रखा जाता है। इन तीन दिनों में कोई पूजा या धार्मिक अनुष्ठान नहीं होता। चौथे दिन शुद्धिकरण अनुष्ठान के बाद ही मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस वर्ष, अंबुबाची मेला 22 जून 2026 से शुरू होगा और 26 जून तक चलेगा।


अंबुबाची मेले की मान्यताएं

अंबुबाची मेले से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि जब मंदिर का पट बंद किया जाता है, तो वहां एक सफेद कपड़ा रखा जाता है, जो तीन दिन बाद लाल हो जाता है। भक्तों को इसी 'अंगवस्त्र' यानी लाल कपड़े का टुकड़ा प्रसाद के रूप में दिया जाता है, जिसे मां कामाख्या का आशीर्वाद माना जाता है।