कालाष्टमी 2026: काल भैरव की पूजा और विशेष उपाय
कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी 2026: सनातन धर्म में भगवान शिव के रौद्र स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। शिव का यह रूप काल भैरव के नाम से जाना जाता है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। वैशाख माह में आने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से शत्रुओं का नाश, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, और राहु-केतु के दोष दूर करने की मान्यता है। काल भैरव की पूजा से भय से मुक्ति, आत्मविश्वास और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। इस दिन पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
कालाष्टमी का व्रत
इस वर्ष, कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
पूजा विधि
विधि-विधान से काल भैरव की पूजा:
भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और रात्रि में विधि-विधान से पूजा करें। इस पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना, काल भैरव चालीसा का पाठ करना और मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
विशेष उपाय
उपाय:
कालाष्टमी के दिन कुत्तों को भोजन कराना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। मान्यता है कि कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन होता है, इसलिए उसे भोजन कराने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
चौमुखी दीपक:
इस दिन सरसों के तेल का चौमुखी दीपक मुख्य द्वार पर जलाएं। इस दीपक की लौ से काजल बनाकर, इसे घर में मौजूद बच्चों और अन्य सदस्यों के कान के पीछे लगाएं।
जाप:
कालाष्टमी के दिन ॐ कालभैरवाय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।