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कालाष्टमी 2026: भगवान भैरव की पूजा का महत्व और व्रत की विधि

कालाष्टमी 2026 का पर्व भगवान भैरव को समर्पित है, जो 7 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन की पूजा का विशेष महत्व है, खासकर जब यह मंगलवार या रविवार को पड़ता है। जानें इस दिन की पूजा विधि, धार्मिक कथा और उपाय, जो भैरव जी की कृपा प्राप्त करने में सहायक होते हैं।
 

कालाष्टमी 2026 का महत्व

कालाष्टमी 2026: भगवान भैरव को समर्पित कालाष्टमी का दिन विशेष महत्व रखता है। देवों के देव महादेव (भगवान शिव) के उग्र अवतार भगवान भैरव, जो पराक्रमी और विनाशकारी माने जाते हैं, को तंत्र-मंत्र का अधिष्ठाता और दुष्टों को दंड देने वाले 'दंडपाणि' के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में भगवान भैरव की पूजा का सर्वोच्च स्थान है।


कालाष्टमी व्रत की तिथि

पंचांग के अनुसार, भगवान भैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026 को दोपहर 01:24 बजे शुरू होकर अगले दिन 08 जुलाई 2026 को दोपहर 12:21 बजे समाप्त होगी। इस दिन कालाष्टमी व्रत की पूजा 7 जुलाई 2026, मंगलवार को की जाएगी। मान्यता है कि जब कालाष्टमी मंगलवार या रविवार को आती है, तो इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।


धार्मिक कथा

धार्मिक कथा:
शिव महापुराण के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। ब्रह्मा जी ने अपने पांचवें मुख से भगवान शिव के प्रति अपमानजनक शब्द कहे। इस अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने 'काल भैरव' के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया। इस कारण ब्रह्मा जी पर ब्रह्महत्या का पाप लगा और वे अंततः काशी (वाराणसी) पहुंचे, जहां उनके हाथ से ब्रह्मा जी का कपाल छूटा और वे पाप मुक्त हुए।


उपाय और व्रत की विधि

उपाय:
काल भैरव का वाहन कुत्ता माना जाता है। इस दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इसके अलावा, तामसिक भोजन, शराब या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।