खरमास: जानें क्यों इस अवधि में नहीं होते शुभ कार्य?
खरमास का महत्व
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में कुछ विशेष समय ऐसे होते हैं जब शुभ और मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इनमें से एक महत्वपूर्ण अवधि है खरमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
पंचांग के अनुसार, 2026 में खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा। इस एक महीने के दौरान मांगलिक कार्यों से दूरी बनाना और धार्मिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। इस समय पूजा-पाठ, भक्ति, दान-पुण्य और साधना को विशेष महत्व दिया जाता है।
खरमास क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों, धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की अवधि शुरू होती है। इस समय सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल मुहूर्त नहीं बन पाता।
इसलिए परंपरागत रूप से इस अवधि में विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को स्थगित कर दिया जाता है। हालांकि, यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, और इस दौरान भगवान की भक्ति, जप-तप और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
खरमास में मांगलिक कार्यों से परहेज क्यों?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य की गति और ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि शुभ कार्यों के लिए अनुकूल ग्रह योग नहीं बनते।
शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय नए या बड़े कार्यों की शुरुआत करने पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। इसलिए परंपरा के अनुसार लोग विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों को खरमास समाप्त होने के बाद ही करते हैं।
खरमास में किन कार्यों से बचना चाहिए?
खरमास के दौरान कुछ विशेष मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है:
- विवाह और सगाई
- गृह प्रवेश
- नए घर के निर्माण की शुरुआत
- नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना
- मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार
- बड़े शुभ या पारिवारिक आयोजन