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खाटू श्याम मंदिर में विशेष तिलक श्रृंगार के लिए 19 घंटे का बंद

राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में 13 अगस्त की रात से 19 घंटे के लिए बंद रहेगा। इस दौरान विशेष तिलक श्रृंगार की तैयारी की जाएगी। मंदिर 14 अगस्त की शाम 5 बजे फिर से खोला जाएगा, और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष श्रृंगार किया जाएगा। जानें इस धार्मिक प्रक्रिया के बारे में और कब आप दर्शन कर सकते हैं।
 

खाटू श्याम मंदिर का अद्यतन


खाटू श्याम मंदिर की जानकारी: राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर के संबंध में एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। 13 अगस्त की रात से मंदिर के दरवाजे लगभग 19 घंटे के लिए बंद रहेंगे। इस अवधि में भक्त बाबा श्याम के दर्शन नहीं कर सकेंगे। मंदिर में अमावस्या के बाद विशेष तिलक श्रृंगार और पूजा की तैयारियां की जाएंगी। मंदिर के दरवाजे 14 अगस्त की शाम 5 बजे फिर से खोले जाएंगे। इसके बाद 15 अगस्त को बाबा श्याम का विशेष तिरंगा श्रृंगार किया जाएगा। यदि आप 14 अगस्त को सुबह दर्शन का कार्यक्रम बना रहे हैं, तो कृपया अपनी योजना में बदलाव करें।


मंदिर के दरवाजे रात 10 बजे बंद होंगे

श्री श्याम मंदिर समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 13 अगस्त की रात 10 बजे मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। 14 अगस्त को दिनभर आम भक्तों को दर्शन की अनुमति नहीं होगी। अमावस्या के बाद बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार मंदिर की परंपरा का हिस्सा है, जिसके कारण मंदिर को कुछ समय के लिए बंद रखा जाएगा। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे मंदिर बंद रहने के समय का ध्यान रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं। इस दौरान बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार किया जाएगा, जिसमें लगभग 8 से 10 घंटे का समय लग सकता है।


14 अगस्त की शाम को फिर से खुलेगा मंदिर

पूजा और श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 14 अगस्त की शाम 5 बजे मंदिर के दरवाजे फिर से खोले जाएंगे। श्रद्धालुओं को 13 अगस्त रात 10 बजे से 14 अगस्त शाम 5 बजे तक दर्शन का इंतजार करना होगा। दरवाजे खुलने के बाद बाबा श्याम के दर्शन विशेष रूप से होंगे। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा श्याम का तिरंगा थीम पर विशेष श्रृंगार किया जाएगा। गर्भगृह को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस पर विशेष श्रृंगार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के खाटू श्याम पहुंचने की संभावना है।


बाबा श्याम का महत्व

बाबा श्याम को भक्त भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में भीम के पौत्र बर्बरीक युद्ध में शामिल होने जा रहे थे। उनके पास ऐसी शक्ति थी कि वे युद्ध का रुख बदल सकते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी परीक्षा लेने के बाद उनसे शीश दान में मांगा। बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया। मान्यता है कि बर्बरीक के इस त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा श्याम नाम से होगी। इसी कारण बाबा श्याम को श्रद्धालु 'हारे का सहारा' भी कहते हैं। वर्तमान में खाटू श्याम धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सालभर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं।