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गंगा दशहरा: विशेष उपाय और महत्व

गंगा दशहरा, जो हर साल ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को मनाया जाता है, गंगा नदी के महत्व को दर्शाता है। इस दिन गंगाजल के साथ विशेष उपाय किए जाते हैं, जो शनि और राहु-केतु के दोषों से मुक्ति दिलाते हैं। जानें कैसे गंगा स्नान और दान के साथ-साथ अन्य उपायों से आप अपने जीवन में सकारात्मकता ला सकते हैं।
 

गंगा दशहरा का महत्व


गंगा का महत्व
गंगा नदी का जल सनातन धर्म में अत्यधिक पवित्र माना जाता है। इसे माता का दर्जा दिया गया है, और इसके जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है। मृत्यु के बाद अस्थियों का विसर्जन गंगा में करने की परंपरा है, जिससे आत्मा को मोक्ष मिलता है। हर वर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है।


गंगा दशहरा 25 मई को

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से धरती पर आई थीं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा।


इस दिन गंगा स्नान के साथ-साथ गंगाजल के कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं, जो शनि और राहु-केतु के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति दिलाते हैं।


राहु-केतु दोष के उपाय

गंगा दशहरा के दिन श्रद्धा अनुसार, तांबे या चांदी के लोटे में गंगाजल लेकर ॐ नम: शिवाय का जप करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे राहु-केतु के दोष समाप्त होते हैं।


यदि गंगा में स्नान करने का अवसर न मिले, तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे मानसिक भ्रम दूर होता है। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे नकारात्मकता समाप्त होती है।


शनि दोष के उपाय

गंगा दशहरा के दिन सुबह जल्दी उठकर एक लोटे में गंगाजल, काला तिल और कच्चा दूध मिलाकर पीपल के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं।


इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभावों से राहत मिलती है। शनि मंदिर में गंगाजल में सरसों का तेल मिलाकर चढ़ाने से शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति मिलती है।