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गुरुवार को भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा का महत्व

गुरुवार का दिन हिंदू धर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु और देवी तुलसी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जानें कैसे करें तुलसी माता की पूजा और उनके नामों का जप, जिससे आपके जीवन में सुख और समृद्धि आएगी।
 

गुरुवार का महत्व

हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है, जो जगत के पालनहार माने जाते हैं। इस दिन बृहस्पति, जो देवताओं के गुरु हैं, की भी पूजा की जाती है। मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस दिन व्रत का आयोजन किया जाता है, जिसे विवाहित और अविवाहित महिलाएं करती हैं। इस व्रत के माध्यम से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। भगवान विष्णु को देवी तुलसी अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए रविवार को छोड़कर हर दिन तुलसी की पूजा करना आवश्यक है। विशेष रूप से गुरुवार को तुलसी माता की पूजा और आरती करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.


तुलसी माता के नामों का जप

यदि आप अपने जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि चाहते हैं, तो गुरुवार को भगवान श्रीविष्णु की पूजा करते समय तुलसी माता के नामों का जप करना आवश्यक है। आप किसी भी समय तुलसी माला से तुलसी के नामों का जप कर सकते हैं.


तुलसी माता के नाम

ॐ श्री तुलस्यै नमः


ॐ नन्दिन्यै नमः


ॐ देव्यै नमः


ॐ शिखिन्यै नमः


ॐ धारिण्यै नमः


ॐ धात्र्यै नमः


ॐ सावित्र्यै नमः


ॐ सत्यसन्धायै नमः


ॐ कालहारिण्यै नमः


ॐ गौर्यै नमः


ॐ देवगीतायै नमः


ॐ द्रवीयस्यै नमः


ॐ पद्मिन्यै नमः


ॐ सीतायै नमः


ॐ रुक्मिण्यै नमः


ॐ प्रियभूषणायै नमः


ॐ श्रेयस्यै नमः


ॐ श्रीमत्यै नमः


ॐ मान्यायै नमः


ॐ गौर्यै नमः


ॐ गौतमार्चितायै नमः


ॐ त्रेतायै नमः


ॐ त्रिपथगायै नमः


ॐ त्रिपादायै नमः


ॐ त्रैमूर्त्यै नमः


ॐ जगत्रयायै नमः


ॐ त्रासिन्यै नमः


ॐ गात्रायै नमः


ॐ गात्रियायै नमः


ॐ गर्भवारिण्यै नमः


ॐ शोभनायै नमः


ॐ समायै नमः


ॐ द्विरदायै नमः


ॐ आराद्यै नमः


ॐ यज्ञविद्यायै नमः


ॐ महाविद्यायै नमः


ॐ गुह्यविद्यायै नमः


ॐ कामाक्ष्यै नमः


ॐ कुलायै नमः


ॐ श्रीयै नमः


ॐ भूम्यै नमः


ॐ भवित्र्यै नमः


ॐ सावित्र्यै नमः


ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः


ॐ शंखिन्यै नमः


ॐ चक्रिण्यै नमः


ॐ चारिण्यै नमः


ॐ चपलेक्षणायै नमः


ॐ पीताम्बरायै नमः


ॐ प्रोत सोमायै नमः


ॐ सौरसायै नमः


ॐ अक्षिण्यै नमः


ॐ अम्बायै नमः


ॐ सरस्वत्यै नमः


ॐ सम्श्रयायै नमः


ॐ सर्व देवत्यै नमः


ॐ विश्वाश्रयायै नमः


ॐ सुगन्धिन्यै नमः


ॐ सुवासनायै नमः


ॐ वरदायै नमः


ॐ सुश्रोण्यै नमः


ॐ चन्द्रभागायै नमः


ॐ यमुनाप्रियायै नमः


ॐ कावेर्यै नमः


ॐ मणिकर्णिकायै नमः


ॐ अर्चिन्यै नमः


ॐ स्थायिन्यै नमः


ॐ दानप्रदायै नमः


ॐ धनवत्यै नमः


ॐ सोच्यमानसायै नमः


ॐ शुचिन्यै नमः


ॐ श्रेयस्यै नमः


ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः


ॐ विभूत्यै नमः


ॐ आकृत्यै नमः


ॐ आविर्भूत्यै नमः


ॐ प्रभाविन्यै नमः


ॐ गन्धिन्यै नमः


ॐ स्वर्गिन्यै नमः


ॐ गदायै नमः


ॐ वेद्यायै नमः


ॐ प्रभायै नमः


ॐ सारस्यै नमः


ॐ सरसिवासायै नमः


ॐ सरस्वत्यै नमः


ॐ शरावत्यै नमः


ॐ रसिन्यै नमः


ॐ काळिन्यै नमः


ॐ श्रेयोवत्यै नमः


ॐ यामायै नमः


ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः


ॐ श्यामसुंदरायै नमः


ॐ रत्नरूपिण्यै नमः


ॐ शमनिधिन्यै नमः


ॐ शतानन्दायै नमः


ॐ शतद्युतये नमः


ॐ शितिकण्ठायै नमः


ॐ प्रयायै नमः


ॐ धात्र्यै नमः


ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः


ॐ कृष्णायै नमः


ॐ भक्तवत्सलायै नमः


ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः


ॐ हरायै नमः


ॐ अमृतरूपिण्यै नमः


ॐ भूम्यै नमः


ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः


ॐ श्री तुलस्यै नमः