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चैत्र नवरात्रि: कलश स्थापना का महत्व और विधि

चैत्र नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना का विशेष महत्व है। यह प्रक्रिया देवी दुर्गा का आवाहन करने और पूजा को सफल बनाने के लिए की जाती है। जानें इस वर्ष के शुभ मुहूर्त और कलश में डालने वाली सामग्री के बारे में। इस लेख में नवरात्रि के महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
 

कलश स्थापना का महत्व

जानें इसमें क्या-क्या डालना चाहिए
चैत्र नवरात्रि, नई दिल्ली: नवरात्रि के नौ दिन हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये दिन देवी दुर्गा को समर्पित होते हैं। चैत्र माह में नवरात्रि का आयोजन होता है, जो हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है। इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से आरंभ होकर 27 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगी।


माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा

इन नौ दिनों में भक्त माता दुर्गा के नौ रूपों की विशेष पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। चैत्र नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी समय माता का अवतरण हुआ था। पहले दिन कलश की स्थापना अनिवार्य होती है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में कलश स्थापना का क्या महत्व है और इसमें क्या सामग्री डालनी चाहिए।


कलश स्थापना की प्रक्रिया

नवरात्रि और हिंदू पूजा में कलश की स्थापना का अत्यधिक महत्व है। हर शुभ कार्य से पहले कलश स्थापित किया जाता है और देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है। नवरात्रि के दौरान भी कलश की स्थापना की जाती है, जिसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। यह देवी दुर्गा का आवाहन करने का एक तरीका है। कलश सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।


कलश में सामग्री

कलश में सभी देवी-देवताओं, नवग्रहों और प्रमुख नदियों का निवास माना जाता है, जो पूजा को सफल बनाता है। इसमें जल (या गंगाजल), सिक्का, लौंग, इलायची, सुपारी, हल्दी और पंचरत्न रखे जाते हैं।


चैत्र नवरात्रि 2026 के शुभ मुहूर्त

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। पहला मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे शुरू होगा और 07:43 बजे समाप्त होगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो दोपहर 12:05 बजे से शुरू होकर 12:53 बजे तक रहेगा।